बिहार विधानसभा का 105वां स्थापना दिवस (Bihar Vidhan Sabha) आज लोकतांत्रिक परंपराओं और तकनीकी परिवर्तन के संगम के रूप में दर्ज हो गया। इस अवसर पर विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम ने सिर्फ बीते इतिहास को याद नहीं किया, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय की। कार्यक्रम को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संबोधित किया, जहां उन्होंने विधायी कार्यप्रणाली में तकनीक की भूमिका को लोकतंत्र के सशक्तिकरण से जोड़ा। उनके संबोधन का मूल स्वर यही रहा कि डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी और जनता तक सूचनाओं की पहुंच पहले से कहीं अधिक सुगम बनेगी।
सेंट्रल हॉल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के आधुनिकीकरण के सवाल पर राजनीतिक मतभेद पीछे छूट सकते हैं। समारोह में राज्यसभा के सभापति हरिवंश और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू की मौजूदगी ने इस आयोजन को राष्ट्रीय महत्व का स्वरूप दिया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सभी अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की, जो परंपरा और परिवर्तन के संतुलन का प्रतीक बनकर उभरा।
बिहार विधानसभा स्थापना दिवस पर किरण रिजिजू का बड़ा संदेश.. राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
105वें स्थापना दिवस के मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा ‘डिजिटल हाउस’ का उद्घाटन किया गया। इस पहल के साथ बिहार विधानसभा की कार्यप्रणाली पूरी तरह डिजिटल हो गई है। अब सदन की कार्यवाही, दस्तावेजों का आदान-प्रदान, प्रश्नोत्तर, विधायी प्रस्ताव और अभिलेखों का संधारण तकनीकी प्लेटफॉर्म पर होगा। इससे न केवल कागज आधारित प्रक्रियाओं पर निर्भरता घटेगी, बल्कि विधायकों को भी रियल टाइम जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। विशेषज्ञों की मानें तो यह बदलाव बिहार विधानसभा को देश की उन अग्रणी विधानसभाओं की कतार में खड़ा करता है, जिन्होंने ई-विधान और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाकर कामकाज में पारदर्शिता और गति लाई है।
बता दें बिहार विधानसभा की स्थापना 7 फरवरी, 1921 को गई थी। सर वाल्टर मोरे की अध्यक्षता में निर्वाचित प्रांतीय परिषद की पहली बैठक आयोजित की गई थी।


















