बिहार विधानसभा के बजट सत्र (Bihar Budget Session) का पांचवां दिन शुरू होने से पहले ही राजनीतिक तापमान चरम पर दिखा। सदन के बाहर और परिसर में विपक्ष का आक्रोश साफ नजर आया, जहां NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत और सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर जोरदार विरोध हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब विधानसभा के मुख्य द्वार पर पहुंचे तो विपक्षी विधायक तख्तियां लेकर नारेबाजी कर रहे थे। कुछ देर के लिए प्रवेश मार्ग अवरुद्ध रहा, फिर विरोध के बीच विपक्ष ने रास्ता दिया और मुख्यमंत्री सदन के भीतर पहुंचे।
कार्यवाही शुरू होने से पहले पोर्टिको में विपक्षी दलों का जमावड़ा लगा रहा। नारेबाजी में शिक्षा व्यवस्था की खामियों से लेकर कानून-व्यवस्था तक के सवाल उठाए गए। विपक्ष का आरोप था कि NEET छात्रा की मौत केवल एक व्यक्तिगत हादसा नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। वहीं सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर यह नैरेटिव सामने आया कि छात्रा के मामले में आवाज उठाने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया गया कि असहमति की आवाज को दबाने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
चनपटिया से कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन पोर्टिको में प्रदर्शन के दौरान खास तौर पर चर्चा में रहे। उनकी टी-शर्ट पर लिखे नारे ने राजनीतिक विरोध को प्रतीकात्मक भाषा दी और मीडिया का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव बिहार की बेटी के लिए दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले थे और इसी वजह से उनकी गिरफ्तारी की गई। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए खुलकर समर्थन देने का ऐलान किया। यह बयान विपक्ष की रणनीति को उजागर करता है, जिसमें व्यक्तिगत मामलों को व्यापक लोकतांत्रिक विमर्श से जोड़ा जा रहा है।
कांग्रेस विधायक कमरुल होदा का बयान इस टकराव को और तीखा बनाता है। उनके मुताबिक रात के समय इस तरह सांसद को उठाया जाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इसे सत्ता के केंद्रीकरण और असहमति के दमन की प्रवृत्ति से जोड़ा। इस तरह बजट सत्र का एजेंडा जहां विकास और वित्तीय नीतियों पर केंद्रित होना था, वहीं सदन के बाहर लोकतंत्र, कानून-व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस हावी दिखी।






















