बिहार विधानसभा के 105वें स्थापना दिवस पर शनिवार, 7 फरवरी 2026 को पटना में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राज्य की संसदीय परंपराओं को भविष्य की तकनीक से जोड़ दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने डिजिटल हाउस (Bihar Vidhan Sabha Digital) का उद्घाटन करते हुए बिहार विधानसभा को पूरी तरह पेपरलेस और टेक्नोलॉजी-संचालित सदन के रूप में औपचारिक रूप से लॉन्च किया। इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा समेत कई वरिष्ठ नेता और मंत्री मौजूद रहे। यह आयोजन केवल एक औपचारिक समारोह नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र के कामकाज को पारदर्शी, तेज और जनता के और करीब लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
डिजिटल हाउस के शुभारंभ के साथ बिहार विधानसभा की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव की शुरुआत हो गई है। अब प्रश्नोत्तर, विधायी दस्तावेज, एजेंडा, नोटिस और बहसों की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इससे जहां सदन के भीतर कार्यवाही अधिक सुव्यवस्थित होगी, वहीं आम नागरिक भी लाइव प्रसारण और डिजिटल आर्काइव के जरिए अपने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सीधे देख-समझ सकेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि पेपरलेस विधानसभा न केवल पर्यावरण के लिहाज से बेहतर है, बल्कि समय और संसाधनों की बचत के साथ विधायी गुणवत्ता को भी बढ़ाती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बिहार से अपने भावनात्मक जुड़ाव की बात करते हुए राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बिहार महात्मा बुद्ध की धरती है और जिस धर्म को वे मानते हैं, उसकी जड़ें इसी मिट्टी से निकली हैं। उनके शब्दों में बिहार की पहचान केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक और वैश्विक विरासत का भी केंद्र है। सदन में बिहार के जनप्रतिनिधियों की वाकपटुता और बहस की गुणवत्ता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की चर्चाएं जीवंत और विचारोत्तेजक होती हैं।
डिजिटल बदलाव पर बात करते हुए किरण रिजिजू ने इसे देश के लिए उदाहरण बताया। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार विधान परिषद पहले ही डिजिटल हो चुकी है और अब विधानसभा का डिजिटल होना इस दिशा में एक और मजबूत कदम है। इससे आम लोगों को सीधे अपने नेता की बात सुनने और सदन की कार्यवाही से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार, देश की विधान परिषदों और विधानसभाओं के बीच बिहार का यह प्रयोग बाकी राज्यों के लिए सीख का मॉडल बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार देश का पहला सदन रहा है जिसने लाइव प्रसारण की पहल की और आज वही परंपरा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर और सशक्त हो रही है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में लोकतंत्र की चुनौतियों की चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत में एक लोकसभा क्षेत्र में औसतन 25 लाख लोग आते हैं, जबकि ब्रिटेन जैसे देशों में यह संख्या कहीं कम है। ऐसे में भारतीय जनप्रतिनिधियों के सामने अपेक्षाएं और जिम्मेदारियां कहीं अधिक होती हैं। उन्होंने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ की परिकल्पना का जिक्र करते हुए कहा कि इससे संसाधनों की बचत और शासन की निरंतरता में सुधार हो सकता है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों का असली दायित्व अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा करना है और तकनीक इस सेवा को अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम बन सकती है।
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में किरण रिजिजू ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि आज किसी विषय पर जानकारी चाहिए तो एआई की मदद से कुछ ही सेकंड में व्यापक सूचनाएं मिल सकती हैं, लेकिन असली ताकत व्यक्ति की लगन और मेहनत में है। उनका मानना है कि तकनीक जनप्रतिनिधियों को बेहतर तैयारी और सटीक निर्णय लेने में मदद कर सकती है, पर लोकतंत्र की आत्मा बहस, संवाद और जिम्मेदारी से ही मजबूत होती है। बिहार विधानसभा की बहसों को उन्होंने उच्च स्तर का बताते हुए कहा कि यह सदन न केवल देखने में रोचक है, बल्कि विचारों की दृष्टि से भी सार्थक है।






















