बिहार विधानसभा (Bihar Vidhan Sabha News) की कार्यवाही के दौरान उस वक्त दिलचस्प राजनीतिक स्थिति बन गई जब सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष और महनार से विधायक उमेश कुशवाहा ने अपनी ही पार्टी के मंत्री अशोक चौधरी से तीखे सवाल पूछ दिए। ग्रामीण इलाकों में संपर्क पथ निर्माण को लेकर उठाए गए इस मुद्दे ने न सिर्फ सदन का माहौल गरमा दिया बल्कि सरकार की ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति पर भी बहस छेड़ दी।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान उमेश कुशवाहा ने ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़े सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या राज्य सरकार उन टोलों में संपर्क पथ उपलब्ध कराने की योजना बना रही है, जहां अब तक कोई सड़क संपर्क नहीं है। उनका सवाल सीधे तौर पर ग्रामीण बुनियादी ढांचे की स्थिति और सरकार के दावों की वास्तविकता पर केंद्रित था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सत्ता पक्ष के भीतर भी विकास कार्यों की गति को लेकर चिंता मौजूद है।
ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना का उल्लेख किया और बताया कि यह योजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि पहले चरण में 500 टोलों का चयन किया गया था, फिर 250 अतिरिक्त टोलों को जोड़ा गया। बाद में यह निर्णय लिया गया कि जिन टोलों की आबादी सौ या उससे अधिक है, वहां भी सड़क संपर्क प्रदान किया जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि विभाग का लक्ष्य लगातार बढ़ रहा है और फिलहाल बिहार में करीब 11,020 ऐसे टोले हैं जहां अभी तक संपर्कता नहीं है, जिनकी कुल लंबाई लगभग 14 हजार किलोमीटर है। सरकार ने इन सभी को तीन वित्तीय वर्षों में जोड़ने का लक्ष्य तय किया है और दावा किया कि पिछले वित्तीय वर्ष में निर्धारित लक्ष्य से अधिक काम हुआ है।
हालांकि मंत्री के जवाब से उमेश कुशवाहा संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने सदन में कहा कि विभाग को जो रिपोर्ट मिली है वह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विभागीय नियमों के अनुसार चिह्नित बसावटों में संपर्क पथ का निर्माण कब तक पूरा होगा और इसके लिए स्पष्ट समयसीमा बताई जानी चाहिए। इससे यह संकेत मिला कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को लेकर सरकार के आंकड़ों और जमीनी स्तर के अनुभवों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मंत्री अशोक चौधरी ने अपने जवाब में कहा कि सरकार का प्रयास है कि तय लक्ष्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए, लेकिन परियोजनाओं की गति वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। उनके इस जवाब ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की प्रगति बजट और फंडिंग से सीधे जुड़ी हुई है।






















