बिहार विधान सभा (Bihar Vidhan Sabha) में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान हज यात्रियों की सुविधा को लेकर उठा सवाल राजनीतिक और प्रशासनिक सीमाओं की एक अहम तस्वीर पेश कर गया। सदन में विधायकों ने मांग की कि बिहार से हज पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पटना से सीधे हवाई उड़ान की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें कोलकाता या दिल्ली जैसे अन्य राज्यों के एयरपोर्ट पर निर्भर न रहना पड़े। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि हज उड़ानों का अंतिम निर्णय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
मंत्री ने सदन को बताया कि हज यात्रा से जुड़ी पूरी प्रक्रिया और उड़ान संचालन का निर्धारण Haj Committee of India द्वारा किया जाता है। यात्रियों की संख्या, आर्थिक व्यावहारिकता और लॉजिस्टिक सुविधा जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह तय होता है कि किस शहर से हज फ्लाइट संचालित होगी। राज्य सरकार इस प्रक्रिया में न तो हस्तक्षेप करती है और न ही कोई बाधा डालती है।
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बहस के दौरान कई सदस्यों ने कहा कि बिहार से हर साल बड़ी संख्या में लोग हज यात्रा पर जाते हैं। ऐसे में यदि राजधानी पटना से सीधी उड़ान उपलब्ध हो जाए तो बुजुर्ग और महिलाओं सहित यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। फिलहाल अधिकांश यात्री कोलकाता और दिल्ली एयरपोर्ट से उड़ान भरते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त यात्रा, समय और खर्च का सामना करना पड़ता है।
मंत्री विजय कुमार चौधरी ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकार की ओर से पटना से हज उड़ान पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि उन्होंने यह तथ्य सामने रखा कि पटना से उड़ान संचालन की लागत अपेक्षाकृत अधिक पड़ती है। इसी कारण बड़ी संख्या में यात्री कोलकाता या दिल्ली से यात्रा करना आर्थिक रूप से अधिक सुविधाजनक मानते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि यात्रियों की संख्या और मांग पर्याप्त हो तो केंद्र स्तर पर इस विषय पर पुनर्विचार संभव है।






















