बिहार विधानसभा के बजट सत्र (Bihar Assembly Budget Session) के पांचवें दिन सदन का माहौल शुरू से ही गरम रहा। प्रश्नकाल के दौरान सरकार विधायकों के सवालों का जवाब दे रही थी, लेकिन कब्रिस्तान की घेराबंदी को लेकर विपक्ष ने मुद्दा उठाते ही बहस ने सियासी रंग ले लिया। एआईएमआईएम के विधायकों ने राज्य में कब्रिस्तानों की सुरक्षा और सीमांकन को लेकर सवाल दागे, जिसके बाद सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। विपक्ष का आरोप था कि स्थानीय स्तर पर कब्रिस्तानों की घेराबंदी नहीं होने से विवाद और अतिक्रमण की आशंका बनी रहती है, इसलिए सरकार को स्पष्ट नीति के साथ बजट आवंटन करना चाहिए।
इस पर गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नियमों में बदलाव कर विधायकों की विकास निधि से कब्रिस्तान की घेराबंदी की अनुमति देने जा रही है। यानी अब स्थानीय विधायक अपने क्षेत्र में इस काम के लिए फंड का इस्तेमाल कर सकेंगे। मो. सरवर आलम के सवाल के जवाब में सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया कि नई व्यवस्था से जमीनी स्तर पर लंबे समय से चली आ रही मांग को समाधान मिलेगा और प्रशासनिक अड़चनों को दूर किया जाएगा।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास योजना (CMRD) के तहत यदि विधायक चाहें तो इस तरह के कार्य कर सकते हैं। हालांकि, इस योजना में कब्रिस्तान की घेराबंदी जैसी मांग सीधे तौर पर शामिल नहीं थी। विधायक ने बताया कि जब उन्होंने संबंधित अधिकारियों के पास यह मामला रखा तो उन्हें कहा गया कि यह मामला मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास सूची में शामिल नहीं है, इसलिए फिलहाल इसे पूरा करना संभव नहीं है।
विधायक ने इस पर जोर देते हुए कहा कि यह मामला धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सूची को अपडेट कर इस संवेदनशील मामले को शामिल किया जाए। इसके बाद सरकार ने आदेश जारी कर सूची में बदलाव करने और इस मामले को प्राथमिकता से पूरा कराने का निर्देश दिया।
इसी बीच सदन में एक दिलचस्प पल तब आया जब गन्ना किसानों से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ही पार्टी के विधायक मंजीत सिंह को टोक दिया। सीएम ने सवाल पूछे जाने के अंदाज पर असहमति जताते हुए कहा कि काहे पूछ रहे हो। यह टिप्पणी सदन में चर्चा का विषय बन गई।






















