पटना। अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही बिहार में मौसम (Bihar Weather Alert) ने अचानक करवट ले ली है। मानसून की विदाई से पहले बारिश एक बार फिर सक्रिय हो गई है, और इसके साथ ही राज्य के अधिकांश जिलों में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है। राजधानी पटना समेत 24 जिलों में आज तेज बारिश, गरज-चमक और वज्रपात की संभावना है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ने के पूरे आसार बन रहे हैं।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 2 से 7 अक्टूबर तक बिहार में भारी बारिश की संभावना है। यह बारिश केवल राहत नहीं बल्कि चेतावनी भी लेकर आई है। खासकर उत्तर और पूर्वी बिहार के जिलों में तेज हवाओं के साथ मूसलधार बारिश हो सकती है, जिससे निचले इलाकों में जलजमाव, सड़क जाम और बिजली आपूर्ति में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है।
राजनीतिक पहेली बनी चिराग पासवान की रणनिति.. खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं, सब बताया
इस समय जिन जिलों में अलर्ट जारी किया गया है, उनमें पटना, गया, भागलपुर, मुंगेर, नवादा, नालंदा, अरवल, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, लखीसराय, जमुई, खगड़िया, बेगूसराय, शेखपुरा, सारण, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण प्रमुख हैं। इन इलाकों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और मेघगर्जन के साथ वज्रपात होने की चेतावनी दी गई है। इससे विशेषकर किसानों, खुले क्षेत्र में कार्यरत लोगों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम में इस बदलाव की मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर सिस्टम है। उत्तर अंडमान सागर के ऊपर चक्रवातीय हवाओं के कारण यह सिस्टम तेजी से पश्चिम-उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है। इसके असर से बिहार में न केवल बारिश बढ़ेगी, बल्कि दिन और रात के तापमान में गिरावट भी देखी जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिलेगी।
बिहार चुनाव से पहले नीतीश सरकार का बड़ा प्रशासनिक दांव.. एक साथ 51 पुलिस इंस्पेक्टर बने DSP
राजधानी पटना और आसपास के जिलों में मंगलवार की सुबह से ही बादलों की गड़गड़ाहट के साथ रुक-रुक कर बारिश जारी है। सड़कें भींग चुकी हैं, ट्रैफिक धीमा है और लोगों को छतरी के सहारे बाहर निकलना पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह बारिश और अधिक तेज हो सकती है, खासकर 3 और 4 अक्टूबर को।
इस बीच प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से अलर्ट जारी कर दिया गया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वज्रपात के समय पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में न जाएं, मोबाइल या धातु के सामान का उपयोग न करें और घरों में ही सुरक्षित रहें। स्कूलों में भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं।






















