नयी दिल्ली: बीजू जनता दल (बीजेडी) ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर अपने स्टैंड में अचानक बदलाव किया है। गुरुवार को पार्टी ने ऐलान किया कि इसके राज्यसभा सांसद इस मुद्दे पर अपनी मर्जी से फैसला ले सकेंगे। हैरानी की बात यह है कि एक दिन पहले ही बीजेडी ने दावा किया था कि उसके सभी राज्यसभा सांसद इस बिल के खिलाफ खड़े होंगे और सदन में इसकी मुखालफत करेंगे।
बीजेडी के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा, “हम अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं को समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं। गहन विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने फैसला लिया है कि हमारे सांसद अपने विवेक से वोट करेंगे। इस दौरान कोई पार्टी व्हिप लागू नहीं होगा।”
क्या है बीजेडी का यू-टर्न?
बुधवार को सस्मित पात्रा ने कहा था कि बीजेडी सांसद मुजीबुल्ला खान राज्यसभा में मुस्लिम समुदाय की आवाज बनेंगे और बिल को लेकर पार्टी की आपत्तियों को मजबूती से उठाएंगे। बीजेडी ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की समीक्षा के बाद भी बिल के कुछ प्रावधानों को अपर्याप्त बताते हुए असंतोष जताया था। लेकिन अब पार्टी ने अपने सांसदों को खुली छूट देकर सबको चौंका दिया है।
सांसद ने नियमों पर उठाए थे सवाल
चर्चा के दौरान बीजेडी सांसद मुजीबुल्ला खान ने वक्फ बिल के एक नियम पर कड़ा एतराज जताया था। उन्होंने कहा, “बिल में यह साबित करना जरूरी है कि कोई मुसलमान है। यह कैसे होगा? मैं बिना दाढ़ी का मुसलमान हूं, रोजा रखता हूं, पांच वक्त की नमाज पढ़ता हूं। सरकार इस नियम से क्या हासिल करना चाहती है?”
राज्यसभा में गरमागरम बहस
लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा के बाद अब राज्यसभा में इस बिल पर जोरदार बहस चल रही है। बीजेपी सांसदों ने विपक्ष पर “भ्रामक जानकारी फैलाने” का इल्जाम लगाया, तो तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद मोहम्मद नदीमुल इस्लाम ने इसे “संस्कृति पर हमला” बताया और केंद्र पर वक्फ संपत्तियों पर कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने बुधवार को यह बिल पेश किया था। लोकसभा में देर रात तक चली बहस के बाद बिल 288 वोटों से पास हो गया, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। अब राज्यसभा में होने वाला मतदान इस बिल के भविष्य को तय करेगा, और सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं।