जनवरी के अंत से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP Budget Session 2026) ने खुद को पूरी तरह संसदीय और चुनावी मोड में शिफ्ट कर लिया है। 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र को भाजपा नेतृत्व 2026 के चुनावी कैलेंडर के लिहाज से बेहद अहम मान रहा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में 20 और 21 जनवरी को भाजपा मुख्यालय में मैराथन बैठकों का दौर चला। करीब आठ घंटे तक चली इन बैठकों में वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रदेश प्रभारी, राज्य अध्यक्ष, सांसद और पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता शामिल हुए। इन बैठकों का मकसद सिर्फ आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति तय करना नहीं था, बल्कि संसद के भीतर और बाहर सरकार के पक्ष को एकजुट, आक्रामक और तथ्य आधारित तरीके से रखने की रूपरेखा तैयार करना भी था।
बैठकों में पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्यों पर विशेष फोकस रहा, लेकिन इसके साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि संसद का बजट सत्र भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक मंच होगा। पार्टी नेतृत्व का आकलन है कि विपक्ष, खासकर INDIA गठबंधन, इस सत्र में सरकार को महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की स्थिति, आर्थिक असमानता, आरक्षण और मणिपुर जैसी हिंसक घटनाओं के मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए सांसदों और प्रवक्ताओं को पहले से ही पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने के निर्देश दिए गए हैं।
नए अध्यक्ष नितिन नबीन ने इन बैठकों में यह भी साफ किया कि पार्टी की लाइन से हटकर कोई भी बयान अब स्वीकार्य नहीं होगा। उनका जोर अनुशासन, तथ्यों और “आक्रामक रक्षा” पर है, ताकि विपक्ष के हमलों के बीच सरकार की छवि कमजोर न पड़े। पार्टी का मानना है कि डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और हालिया कल्याणकारी योजनाओं के ठोस आंकड़े विपक्ष के नैरेटिव को काटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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27 जनवरी 2026 को होने वाली सर्वदलीय बैठक को भी भाजपा बेहद गंभीरता से ले रही है। पार्टी नेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे वहां भी पूरी तैयारी के साथ जाएं, ताकि सत्र की रूपरेखा तय करते समय भाजपा का पक्ष प्रभावी ढंग से सामने आ सके। सूत्रों के अनुसार, लक्ष्य यही है कि पूरे सत्र के दौरान मीडिया कवरेज में सरकार आत्मविश्वास से भरी और मजबूत नजर आए।
हालांकि इस पूरी रणनीति पर सार्वजनिक रूप से बोलने से पार्टी नेताओं को परहेज करने को कहा गया है। नाम न छापने की शर्त पर एक राष्ट्रीय प्रवक्ता का कहना है कि भाजपा में ऐसी बैठकें नियमित होती रहती हैं और बजट सत्र को लेकर विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे दल एसआईआर समेत कई मुद्दों पर सिर्फ इसलिए हंगामा कर रहे हैं ताकि चुनावी राज्यों में खुद को सक्रिय दिखा सकें, लेकिन जनता अब इन प्रयासों को समझ चुकी है।




















