ऐसा पहली बार 2014 में ही हुआ जब कांग्रेस को छोड़ कर किसी दूसरी पार्टी को लोकसभा में पूर्ण बहुमत मिला। यह मौका भारतीय जनता पार्टी को मिला है। भाजपा पिछले आठ सालों से केंद्रीय सत्ता में है। राज्यों में भी भाजपा का दखल बढ़ा है और अधिकतर राज्यों में या तो भाजपा सत्ता में है या फिर उसकी सहयोगी। लेकिन भाजपा की इन तमाम उपलब्धियों के बाद भी एक जगह ऐसी है, जहां BJP बहुमत से कहीं दूर है। हर बार भाजपा प्रयास जरूर करती है लेकिन इस बार की कोशिश भाजपा को भारी पड़ गई है।
‘फिर शतक का इंतजार’

लोकसभा में भाजपा पूर्ण बहुमत में है। सहयोगियों को मिला लें तो सरकार बहुमत से कहीं आगे है। लेकिन राज्यसभा में यह स्थिति नहीं है। यहां भाजपा अपने सहयोगियों के साथ तो अच्छे आंकड़ों में दिख जाती है। लेकिन अकेले बहुमत के आंकड़े से दूर है। राज्यसभा में सीटें 232 हैं लेकिन अभी भाजपा के पास 100 भी नहीं है। हालांकि अप्रैल में भाजपा ने राज्यसभा में शतक का आंकड़ा छू लिया था। लेकिन बाद में फिर यह संख्या कम हो गई। अब दुबारा भाजपा को राज्यसभा शतक का इंतजार है।
बढ़ने के बजाय घट गए सांसद
राज्यसभा में अभी 57 सीटों के लिए चुनाव हुए। इसमें 41 तो निर्विरोध ही चुन लिए गए। इसमें भाजपा के 14 सांसद निर्विरोध जीते। चुनाव से पहले भाजपा के राज्यसभा में 95 सांसद थे लेकिन अब चुनाव के बाद यह संख्या 91 ही रह गई है। जो 57 सीटें खाली हुई उसमें 26 पर भाजपा के सांसद थे लेकिन भाजपा को जीत मिली है 22 सीट पर।
UP ने दिया फायदा, राजस्थान में झटका
41 राज्यसभा सांसदों के निर्विरोध चुने जाने के बाद 16 सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसमें भाजपा को सबसे बड़ा फायदा उत्तरप्रदेश में मिला है। यहां भाजपा के पांच सदस्य ही रिटायर हो रहे थे। लेकिन नए नतीजों ने भाजपा को तीन सीटें बढ़ा कर दी। वहीं महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक की 16 सीटों से भाजपा को आठ सीटें मिली। बड़ा झटका राजस्थान में लगा है, जहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे सुभाष चंद्रा को भाजपा ने समर्थन दिया था। सुभाष चंद्रा चुनाव में हार गए। जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक ने भाजपा को तीन-तीन सीटें दी हैं। हरियाण और राजस्थान में एक-एक सीटों पर भाजपा जीती।




















