SIR को लेकर उत्पन्न विवाद और संसद में लगातार हो रही राजनीतिक हलचल ने केंद्र की राजनीति में एक बार फिर तापमान बढ़ा दिया है। संजय जायसवाल ने विपक्ष पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि संसद देश की समस्याओं पर चर्चा का स्थल है, लेकिन विपक्ष ने पूरे मानसून सत्र को ‘वोट चोरी’ के आरोपों में उलझाकर रखा।
उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव इसके बाद हुए, लेकिन एक भी नागरिक ने मत चोरी की शिकायत नहीं की। संजय जायसवाल के अनुसार, राहुल गांधी बिहार का दौरा करते रहे पर उन्हें भी एक भी ऐसा मामला नहीं मिला जो विपक्ष के आरोपों को साबित करता। उन्होंने यहां तक कहा कि बिहार में 70 प्रतिशत मतदान इसलिए दर्ज हुआ क्योंकि मतदाता सूची में मृतकों और दो जगह नाम दर्ज होने जैसी त्रुटियां थीं, जिनका लाभ वे लोग उठाना चाहते हैं जिनका उद्देश्य “धांधली या घोटाला” करना होता है।

संजय जायसवाल ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को भी इससे जोड़ा और कहा कि विपक्ष अपनी हार के डर से SIR का विरोध कर रहा है और बंगाल में रोहिंग्या और बांग्लादेशी वोटों पर निर्भर है, जबकि ममता बनर्जी की सरकार का भरोसा “भारतीय बंगालियों” पर नहीं रह गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष की कार्यशैली पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता मंगल पांडे ने विपक्ष की भूमिका को ‘नकारात्मक’ बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से विपक्ष सदन को बाधित करने, बहस रोकने और जनहित के मुद्दों को दबाने में सक्रिय रहा है। मंगल पांडे के अनुसार, प्रधानमंत्री ने केवल यही कहा है कि यदि विपक्ष संसद में आया है तो उसे सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए और राष्ट्रीय हित से जुड़े विषयों को गंभीरता से उठाना चाहिए।

मंगल पांडे ने अपने बयान में यह भी तंज कसा कि यदि विपक्ष मुद्दों को समझने या संसद में प्रभावी ढंग से रखने में सक्षम नहीं है तो उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जाकर “क्लास” ले लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी की क्लास से विपक्ष की गुणवत्ता सुधर जाएगी, क्योंकि प्रधानमंत्री उन्हें सिखा देंगे कि विपक्ष को सदन के भीतर और बाहर कैसी मर्यादा और कैसी भाषा का प्रयोग करना चाहिए।






















