बिहार में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति अब एक कदम आगे बढ़ रही है। अब तक मीडिया और सोशल मीडिया के सामने एक दूसरे पर बरस रहे सत्तापक्ष और विपक्ष के पास आमने सामने का मौका आ गया है। 24 अगस्त से दो दिनों का विधानमंडल सत्र शुरू हो रहा है। इसमें पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष का चयन होगा। जबकि दूसरे दिन विधान परिषद के सभापति का। इससे पहले 23 अगस्त को भाजपा और राजद दोनों पार्टियों अपने विधानमंडल सदस्यों की बैठक बुलाई है। इसमें कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
तेजस्वी देंगे सदस्यों को सत्ता में रहने का मंत्र
सालों से राजद सत्ता से बाहर है। ऐसे में विधानमंडल में सदस्यों का व्यवहार भी विपक्ष की तरह हो गया है। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। राजद सत्ता में है। ऐसे में विधायकों व विधान पार्षदों का व्यवहार बदलना होगा। आज की बैठक में तेजस्वी यादव अपने विधायकों को यही मंत्र देंगे कि सदन में दल की स्ट्रेटजी क्या होगी। राजद को विधानसभा में अध्यक्ष पद मिलना लगभग तय है। इस पद पर अवध बिहारी चौधरी को जगह मिलने की चर्चा भी लगभग पुख्ता है। ऐसे में इसकी आधिकारिक एनाउंसमेंट हो सकती है। वहीं विधान परिषद में सभापति की कुर्सी जदयू को जाएगी, जिस पर देवेश चंद्र ठाकुर को जगह मिलेगी।
भाजपा के पास डबल एजेंडा
सरकार से बाहर हो चुकी भाजपा वैसे तो सहज दिखने का प्रयास कर रही है, लेकिन अंदरखाने में इसकी समस्याएं भी कम नहीं है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तारकिशोर होंगे या फिर एक बार फिर प्रेम कुमार या नंद किशोर को जिम्मेदारी मिलेगी, यह अब तक तय नहीं है। नितिन नवीन, संजीव चौरसिया या दूसरे किसी युवा नेता को आगे किया जाएगा, यह भी विचारणीय और विवाद का विषय है। दूसरी ओर विधान परिषद में भी नेता प्रतिपक्ष का चयन होना है। इसमें नवल किशोर यादव, सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय को जिम्मेदारी मिलेगी या सरकार से हटने पर भी शाहनवाज की पूछ बरकरार रहेगी, यह भी देखना होगा। 23 अगस्त को विधानमंडल दल की बैठक सबकुछ तय होगा।




















