बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता पंकज त्रिपाठी इन दिनों अपनी मां की पुण्यतिथि (बरसी) मनाने अपने पैतृक गांव बेलसंड (बरौली प्रखंड, गोपालगंज जिला) पहुंचे हैं। पिछले कुछ दिनों से यहां ठहरे अभिनेता ने मां को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद गांव की गलियों में घूमते हुए बसंत ऋतु का आनंद लिया और देर रात ग्रामीणों के साथ पारंपरिक फगुआ गीत गाकर माहौल को और भी रंगीन बना दिया।
पंकज त्रिपाठी ने पूजा-अर्चना के बाद गांव में सरसों के खेतों के बीच DDLJ स्टाइल में फोटो खिंचवाईं और ग्रामीणों संग ढोल-झाल पर फगुआ गाते नजर आए। उन्होंने कहा कि गांव में आकर आत्मिक सुकून मिलता है और जमीन से उनका गहरा नाता है। यह देखकर फैंस और ग्रामीण बेहद खुश हैं कि ‘कालीन भैया’ वाली छवि के पीछे छिपा सादगीपूर्ण दिल आज भी अपनी मिट्टी से जुड़ा हुआ है।
माँ के स्मृति में पूजा कार्यक्रम था वही बसंत का आनंद ले रहे हैं….साथियों के साथ फगुआ हुआ बर्षो बाद लोक संस्कृति का अनुभव किये हैं.यही तो यादे है यही स्मृतियां बनाती है आनंद आया यह अब धीरे धीरे लुप्त हो रहा है फगुआ गायन का अगली पीढ़ी को सीखना चाहिए.पंकज त्रिपाठी ने कहा मैं जमीन से निकला हूं जमीन मेरे अंदर से कहा निकला है….जब तक हूं जीवन पर्याप्त नही निकल पायेगा मैं बिहार के सभी लोगो को प्रणाम करता हूँ बसन्त की शुभकामनाएं देता हूँ…






















