Budget 2026 Chabahar Port: भारत के केंद्रीय बजट 2026-27 ने विदेश नीति और रणनीतिक निवेश के मोर्चे पर एक बड़ा संकेत दे दिया है। ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए इस बार बजट में कोई भी राशि आवंटित नहीं की गई है। पिछले वित्त वर्ष में जहां इस परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये रखे गए थे, वहीं अब इसे पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।
बजट दस्तावेजों के मुताबिक “Aid to Countries” शीर्ष के तहत कुल आवंटन बढ़ाकर 5,686 करोड़ रुपये कर दिया गया है, लेकिन चाबहार पोर्ट को इस सूची से बाहर कर दिया गया है। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत और ईरान के बीच हाल ही में 10 साल का दीर्घकालिक समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत को चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन की जिम्मेदारी मिली थी। यह पोर्ट भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक रास्ता माना जाता है, जिससे पाकिस्तान पर निर्भरता खत्म होती है।
सरकार का यह कदम सिर्फ बजटीय फैसला नहीं बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत माना जा रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव, ट्रंप की व्यापार युद्ध नीति और पश्चिम एशिया की अस्थिरता ने भारत को रणनीतिक संतुलन साधने पर मजबूर कर दिया है। माना जा रहा है कि चाबहार पर फंड रोकना भारत की “जोखिम कम करने” की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में न आए।
दूसरी ओर, भारत की पड़ोसी देशों को दी जाने वाली सहायता में पुनर्संतुलन साफ दिख रहा है। बांग्लादेश को मिलने वाली मदद पिछले साल के मुकाबले काफी घटा दी गई है। 2025-26 के बजट में जहां बांग्लादेश को 120 करोड़ रुपये मिले थे, वहीं संशोधित अनुमान में इसे घटाकर 34 करोड़ कर दिया गया था। अब 2026-27 के लिए इसे 60 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के बीच यह संकेत माना जा रहा है कि भारत अपनी वित्तीय सहायता नीति में सतर्कता बरत रहा है।
भूटान इस बार भी भारत की सहायता सूची में सबसे ऊपर है। उसके लिए आवंटन बढ़ाकर करीब 2,289 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल से लगभग 6 प्रतिशत अधिक है। नेपाल को मिलने वाली सहायता 800 करोड़ रुपये कर दी गई है, जबकि श्रीलंका को दी जाने वाली मदद में करीब एक-तिहाई की बढ़ोतरी करते हुए 400 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। यह दर्शाता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपने पारंपरिक मित्र देशों पर ज्यादा फोकस बनाए हुए है।
चाबहार पोर्ट को शून्य सहायता का फैसला भारत की “Neighbourhood First” और “Connect Central Asia” नीति के लिए एक अस्थायी झटका माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से अब तक इसे स्थायी रोक नहीं कहा गया है, लेकिन बजट संकेत देता है कि फिलहाल भारत अपनी प्राथमिकताओं को दक्षिण एशिया और स्थिर साझेदार देशों की ओर मोड़ रहा है।






















