केंद्रीय बजट (Budget 2026) पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने इसे देश की प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित करने वाला बजट करार दिया है। उनका कहना है कि यह बजट केवल राजकोषीय संतुलन या विकास दर के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में किसान, महिला और गरीब कल्याण की वह सोच है जो लंबे समय से भारतीय अर्थव्यवस्था की असली ज़रूरत रही है। सरकार ने इस बार आर्थिक विकास को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को ठोस रूप देने की कोशिश की है।
ललन सिंह के मुताबिक बजट में कृषि क्षेत्र को मजबूती देने पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी आज भी खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि अवसंरचना को सशक्त करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह बढ़ाने और आधुनिक तकनीक को खेतों तक पहुंचाने के प्रावधान किए गए हैं। इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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उन्होंने पशुपालन क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत विश्व में पशुपालन के मामले में प्रथम स्थान पर है, जो किसानों और पशुपालकों की कड़ी मेहनत के साथ-साथ सरकार की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है। बजट में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पशु चिकित्सा सेवाओं की आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। नए पशु चिकित्सालयों की स्थापना, मोबाइल वेटनरी यूनिट्स, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से पशुपालकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
ललन सिंह का मानना है कि यह बजट गांव, खेत और पशुपालक को विकास की मुख्यधारा में लाने की गंभीर कोशिश है। जब किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तभी देश की समग्र अर्थव्यवस्था भी स्थायी रूप से आगे बढ़ेगी। इसी सोच के साथ तैयार किया गया यह बजट आने वाले वर्षों में सामाजिक-आर्थिक बदलाव का आधार बनेगा।






















