केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जहां सरकार इसे विकास और भविष्य की अर्थव्यवस्था का रोडमैप बता रही है, वहीं विपक्ष ने बजट पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बजट पर तत्काल प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि वह अपनी बात रखने के लिए संसद का मंच इस्तेमाल करेंगे। उनकी इस टिप्पणी को विपक्ष की रणनीतिक चुप्पी के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में सरकार को सदन में कड़ी चुनौती मिल सकती है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट भाषण की सीमित जानकारी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बजट भाषण में केवल तीन-चार हेडलाइंस सामने आईं, जबकि जरूरी सेक्टरों पर ठोस विवरण गायब रहा। थरूर ने विशेष रूप से ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केरल, जहां आयुर्वेद की सदियों पुरानी परंपरा है, उसका नाम तक नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब मछुआरों और नारियल का जिक्र हुआ, जो केरल से जुड़ा हो सकता है, तब शिप रिपेयर के नाम पर केवल वाराणसी और पटना का उल्लेख क्यों किया गया। उनके मुताबिक, यह हैरान करने वाला है और संभव है कि बजट दस्तावेजों में कुछ और विवरण हों, लेकिन भाषण में गहराई की कमी साफ दिखी।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट को गरीब, किसान और गांव में रहने वाले लोगों की समझ से बाहर करार दिया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा बजट है जो गरीब का पेट नहीं भर सकता। रोजगार और नौकरी देने की ठोस योजना के बिना यह केवल सपने दिखाने वाला दस्तावेज बनकर रह गया है। अखिलेश यादव के इस बयान से साफ झलकता है कि विपक्ष बजट को जमीनी हकीकत से कटा हुआ मान रहा है।
इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने बजट को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि पहले बजट ऐसा होता था जिसे पूरा परिवार एक साथ बैठकर देखता था, लेकिन इस बार महिलाओं और युवाओं के लिए कुछ भी नहीं है। डिंपल यादव ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर अधिक खर्च की मांग करते हुए कहा कि बजट में इन सेक्टरों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है, जो भविष्य के लिए चिंताजनक संकेत है।
लोकसभा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने तो बजट पर सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ने युवाओं, मिडिल क्लास, खिलाड़ियों, किसानों या महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया है। उनके अनुसार, इस बजट में इन वर्गों के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने इसे ‘फेकू बजट’ बताते हुए आरोप लगाया कि बजट प्रधानमंत्री कार्यालय में तैयार किया गया है और इसी वजह से प्रधानमंत्री खुद इसकी तारीफ कर रहे हैं।


















