संसद में सोमवार को बजट सत्र (Budget Session) के तीसरे दिन की शुरुआत होते ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर नजर आई। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हो चुकी है और आज लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होने वाली है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल इस प्रस्ताव को पेश करेंगे, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के संकेत पहले से ही दिखाई देने लगे हैं।
इसी बीच संसद परिसर में राष्ट्रीय जनता दल के सांसदों ने बिहार से जुड़े मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आरजेडी नेताओं के हाथों में ऐसे पोस्टर दिखे, जिनमें केंद्र और बिहार सरकार पर बिहार के साथ कथित उपेक्षा का आरोप लगाया गया। पोस्टरों पर लिखा संदेश सीधे तौर पर राजनीतिक संदेश देता नजर आया, जिसमें विशेष राज्य के दर्जे की मांग दोहराई गई और केंद्र तथा राज्य की सत्ताधारी पार्टियों को कठघरे में खड़ा किया गया।
आरजेडी सांसदों ने यह मुद्दा उठाया कि बजट में बिहार को कोई ठोस राहत या विशेष पैकेज नहीं दिया गया, जबकि राज्य लंबे समय से आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा है। उनका कहना है कि विशेष राज्य का दर्जा बिहार की जरूरत है, न कि कोई राजनीतिक सौगात। इसी मांग को लेकर संसद के भीतर और बाहर आवाज बुलंद की गई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान नीट छात्रा की मौत का मामला भी केंद्र में रहा। आरजेडी नेताओं ने इस मामले में बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। उनका दावा है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं हो पा रही है, जिससे आम जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।
आरजेडी सांसद मीसा भारती ने कहा कि बिहार की जनता की कई ऐसी मांगें हैं, जो अब तक अधूरी हैं। बजट सत्र के दौरान इन ज्वलंत मुद्दों को उठाना जरूरी था। उन्होंने विशेष राज्य के दर्जे की मांग को दोहराते हुए कहा कि बजट में बिहार के लिए कुछ भी खास नहीं था। साथ ही नीट छात्रा मौत मामले में सही तरीके से जांच न होने का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब की मांग की।






















