बजट सत्र (Budget Session 2026) के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा और राज्यसभा के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार की नीतियों और दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाषण में देश की जमीनी सच्चाइयों की झलक नहीं दिखी। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरते हुए इसे “दावों और हकीकत के बीच बढ़ती दूरी” का प्रतीक बताया।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के बजट और विकास मॉडल पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पहले से ही अपने बजट के लिए दिल्ली की ओर देखने को मजबूर है और यदि केंद्र से मिलने वाले संसाधनों में कटौती होती है तो राज्य का विकास कैसे आगे बढ़ेगा। अखिलेश ने यह सवाल भी उठाया कि गरीबों और जरूरतमंदों के लिए रोजगार के अवसर कहां से आएंगे। उन्होंने किसानों के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए कहा कि सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों की आय दोगुनी करने का सपना दिखाया था, लेकिन आज यह दावा जमीनी सच्चाई से कोसों दूर नजर आता है। धान, फसलों और दूध के उत्पादन में वैश्विक उपलब्धियों की बात करने वाली सरकार को यह भी बताना चाहिए कि किसान की वास्तविक आय में कितना इजाफा हुआ।
अखिलेश यादव ने शहरी विकास और बुनियादी ढांचे पर भी तंज कसते हुए कहा कि जिन मेट्रो परियोजनाओं का वादा किया गया था, वे आज भी अधूरी हैं। उन्होंने प्रतीकात्मक अंदाज में कहा कि जब जमीन पर मेट्रो नहीं बन पा रही और पानी पर मेट्रो चलाने की बातें हो रही हैं, तो यह विकास के दावों की सच्चाई को उजागर करता है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यदि बुनियादी परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रहीं, तो आगे बढ़ने के दावे खोखले लगते हैं।
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए मनरेगा में किए गए संशोधनों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन संशोधनों का पुरजोर विरोध करती है और जब तक इन्हें वापस नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। रंजीत रंजन के मुताबिक सरकार ने काम के अधिकार को कमजोर किया है और कानून में बदलाव कर अब उसे सही ठहराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसानों की बात तो करती है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य आज भी दोगुना नहीं हुआ, जिससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
Patna News: पटना जंक्शन पर बदला पार्किंग सिस्टम, लोगों को क्यों हो रही परेशानी?
राजद नेता मनोज झा ने राष्ट्रपति के भाषण को देश की चुनौतियों से कटा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि यदि देश की असली समस्याएं महामहिम राष्ट्रपति के संबोधन का हिस्सा नहीं बनतीं, तो इसका अर्थ है कि सरकार व्यापक सोच के बजाय सीमित दायरे में ही फैसले ले रही है। मनोज झा ने VB-G RAM G जैसे मुद्दों पर सरकार से पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि जिस तरह किसान कानूनों को जनदबाव में वापस लेना पड़ा था, उसी तरह इन फैसलों को भी वापस लेना होगा।






















