बिहार की सियासत में हलचल मचाने वाला कैबिनेट विस्तार आखिरकार हकीकत बन गया। महीनों से अटकी इस प्रक्रिया को बीजेपी के आलाकमान ने हरी झंडी दे दी है, लेकिन इसके साथ ही सत्ता के गलियारों में बेचैनी और राजनीतिक समीकरणों की नई पटकथा भी लिखी जा रही है।
बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले बीजेपी ने कैबिनेट विस्तार कर बड़ा सियासी दांव चला है। सात नए मंत्रियों की एंट्री के साथ ही BJP कोटे के पांच मौजूदा मंत्रियों की उड़ान थमनी तय है। उनके विभाग बदलेंगे या कम होंगे।
महीनों से कैबिनेट विस्तार की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन मामला बीजेपी के भीतर ही अटका हुआ था। पार्टी नेतृत्व अन्य राज्यों के चुनावों में व्यस्त था, इसलिए बिहार पर ध्यान नहीं दिया गया। जैसे ही दिल्ली विधानसभा चुनाव खत्म हुआ, बीजेपी आलाकमान की नजर बिहार पर टिक गई।
मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिहार दौरे के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की और कैबिनेट विस्तार पर अंतिम मुहर लगा दी। समझौते के तहत जेडीयू अपने किसी भी विभाग को नहीं छोड़ेगा, जबकि बीजेपी अपने ही कोटे से सात नए मंत्री बनाएगी।
कौन-कौन हो रहा है प्रभावित?
अब बड़ा सवाल यह है कि सात नए मंत्रियों के लिए जगह कहां से बनेगी? इसका हल पुराने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल करके निकाला गया है।
- डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा: पथ निर्माण, खनन और कला-संस्कृति जैसे तीन अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नए मंत्रियों को जगह देने के लिए उनके दो विभाग छीने जाएंगे और उनके पास केवल पथ निर्माण विभाग रहेगा।
- मंगल पांडेय: वर्तमान में स्वास्थ्य और कृषि मंत्रालय संभाल रहे हैं, लेकिन अब कृषि विभाग उनसे लिया जाएगा।
- प्रेम कुमार: उनके पास सहकारिता और वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग हैं। वन एवं पर्यावरण विभाग उनसे वापस लिया जाएगा।
- नीतीश मिश्रा: उद्योग और पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन पर्यटन विभाग उनसे छीनकर नए मंत्री को सौंपा जाएगा।
- नितीन नवीन: नगर विकास और विधि विभाग के मंत्री हैं, लेकिन विधि विभाग उनसे वापस लिया जाएगा।