बिहार में जाति आधारित गणना का काम कई जिलों में 100 फीसदी पूरा हो चुका है। जबकि कुछ जिलों में यह काम 95 फीसदी तक हुआ है। बिहार के सबसे बड़े जिले व राजधानी पटना में गणना का काम 92 फीसदी पूरा हो चुका है। अब संभावना यह है कि सरकार शीघ्र ही इस गणना का रिजल्ट जारी करेगी। जिन जिलों में गणना का काम पूरा हो चुका है, वहां आंकड़ों को मिलाने आदि का काम चल रहा है।
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26 तरह की जानकारियां मांगी गई हैं।
इस गणना में राज्य सरकार ने 26 तरह की जानकारियां मांगी है। सभी जानकारियों को ऑफलाइन मोड में भरा गया है। लेकिन अब सभी जानकारियां ऑनलाइन मोड में भरी जाएंगी। जाति आधारित गणना के तहत घर-घर जाकर हार्ड कॉपी में कॉलमवार जानकारी एकत्र करने क बाद प्रगणकों की टीम सभी जानकारियों को कार्यालय में मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है मामला
एक ओर बिहार सरकार इस मामले में तेजी से काम कर रही है। तो दूसरी ओर जाति आधारित गणना का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिया है। दरअसल, जाति आधारित गणना को रोकने को लेकर की गई सभी याचिकाओं को पटना हाईकोर्ट खारिज कर चुकी है। हाईकोर्ट ने जातिगत जनगणना करने को हरी झंडी दे दी है। इसी फैसले के खिलाफ अब याचिकाकर्ता अखिलेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
बिहार सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में तैयार
जातिगत गणना मामले में रोक लगाने की याचिकाकर्ता की अपील से पहले ही बिहार सरकर ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट अर्जी दाखिल कर दी है। अर्जी में बिहार सरकार का कहना है कि बिना सरकार क पक्ष सुने सुप्रीम कोर्ट कोई आदेश जारी ना करे। आपको बता दें कि पटना हाईकोर्ट में जाति आधारित गणना के खिलाफ याचिका दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया जाति आधारित जनगणना पर अंतरिम रोक लगा दी थी। 3 से 7 जुलाई तक कोर्ट में सुनवाई हुई। 7 जुलाई को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला 1 अगस्त तक के लिए सुरक्षित रख लिया। 1 अगस्त को हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी के खंडपीठ जातिगत जनगणना करने का आदेश दिया।




















