नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने आज दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि गुरुवार को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की गई, जहां वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर 17 घंटे और 2 मिनट तक लगातार चर्चा हुई। यह अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है, जिसे तोड़ना बेहद मुश्किल होगा। रिजिजू ने इस दौरान यह भी बताया कि चर्चा के दौरान एक भी व्यवधान नहीं हुआ, जो संसदीय कार्यवाही के लिए एक सकारात्मक संकेत है। वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर चल रही बहस में रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुस्लिम समुदाय को इस विधेयक के नाम पर डरा रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम करती है और यह विधेयक सभी के हित में है। रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड एक वैधानिक संस्था है और इसे धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वक्फ बोर्ड में केवल मुस्लिम सदस्य ही होंगे, तो हिंदू-मुस्लिम विवादों का समाधान कैसे होगा? वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को शुक्रवार को संसद में पारित कर दिया गया। राज्यसभा में 12 घंटे की मैराथन बहस के बाद इसे 128-95 मतों से मंजूरी मिली। इसके साथ ही, मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2025 भी पारित किया गया। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लाया गया था, जिसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में शामिल करने का प्रावधान है। इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने कड़ा रुख अपनाया।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का आरोप लगाया। विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक और मुस्लिम समुदाय के लिए हानिकारक बताया। वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि इराक जैसे मुस्लिम देशों ने भी अपनी वक्फ कानूनों में संशोधन किया है। किरेन रिजिजू अरुणाचल प्रदेश से चार बार के लोकसभा सांसद हैं और वर्तमान में 18वीं लोकसभा में तीन बौद्ध सांसदों में से एक हैं। 10 जून 2024 को उन्हें संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों का केंद्रीय मंत्री नियुक्त किया गया था। रिजिजू ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की है और वे पहले गृह राज्य मंत्री, अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री और कानून मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
यह विधेयक और इस पर हुई बहस देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और धार्मिक संस्थाओं में समावेशिता को लेकर एक नई बहस छेड़ सकती है। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद और संयुक्त संसदीय समिति की चर्चाओं में हिस्सा लेने वाले सभी सांसदों और सुझाव देने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह कदम एक सशक्त, समावेशी और संवेदनशील भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण साबित होगा।” इस विधेयक के पारित होने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोगों ने इसे एक साहसिक कदम बताया, तो कुछ ने इसे लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। आने वाले दिनों में इस विधेयक का असर और इस पर लोगों की राय और साफ होगी।