बिहार के छपरा जिले के मशरक थाना क्षेत्र (Musharakh Temple Theft) में उस समय हड़कंप मच गया, जब थाना परिसर से सटे ऐतिहासिक राम जानकी शिव मंदिर में बड़ी चोरी की वारदात सामने आई। यह घटना न सिर्फ धार्मिक आस्था पर गहरी चोट है, बल्कि पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली भी मानी जा रही है। जिस स्थान पर यह दुस्साहसिक चोरी हुई, वहां थाना, डीएसपी, इंस्पेक्टर और थानाध्यक्ष का आवास मौजूद है, बावजूद इसके चोर बेखौफ होकर मंदिर से सदियों पुरानी अष्टधातु की मूर्तियां ले उड़े।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अज्ञात चोरों ने मंदिर के पीछे का ताला काटकर अंदर प्रवेश किया और गर्भगृह के मुख्य कमरे का ताला तोड़कर भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की अष्टधातु मूर्तियों को चुरा लिया। ये मूर्तियां न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनकी कीमत भी लाखों रुपये आंकी जा रही है। चोरी को अंजाम देते समय चोरों ने मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे को भी उखाड़ लिया और उसकी हार्ड डिस्क समेत पूरा सिस्टम अपने साथ ले गए, ताकि पहचान से बचा जा सके।

मंदिर के पुजारी टुन्ना बाबा ने बताया कि जब वे सुबह पूजा के लिए मंदिर पहुंचे तो परिसर का नजारा देख स्तब्ध रह गए। सामान बिखरा हुआ था और गर्भगृह का ताला टूटा पड़ा था। अंदर जाकर देखने पर भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां गायब थीं। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस और स्थानीय लोगों को सूचना दी। खबर फैलते ही आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में जुट गए और आक्रोश का माहौल बन गया।
घटना के बाद मंदिर से कुछ दूरी पर दलित टोला इलाके में ताला काटने वाला कटर बरामद किया गया, जबकि भगवान को पहनाए गए वस्त्र भी पास में ही लावारिस हालत में मिले। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि चोरों ने जल्दबाजी में वारदात को अंजाम दिया और भागते समय कुछ सामान छोड़ दिया। पुलिस के लिए यह एक अहम सुराग माना जा रहा है।

सूचना मिलते ही डीएसपी संजय कुमार सुधांशु पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। बाद में ग्रामीण एसपी संजय कुमार भी मंदिर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। डॉग स्क्वायड टीम को भी जांच में लगाया गया है, हालांकि सीसीटीवी की हार्ड डिस्क चोरी हो जाने के कारण जांच में तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस मंदिर में चोरी हुई है, वह सीधे थाना की बाउंड्री से सटा हुआ है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि अगर यहां सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक हो सकती है, तो अन्य इलाकों की स्थिति क्या होगी। नागरिकों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि चौबीसों घंटे पुलिस की मौजूदगी, नियमित गश्ती और चार वाहनों के दावे इस घटना के बाद खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं।
घटना के बाद इलाके में भय और गुस्से का माहौल है। पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मंदिरों और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा को तत्काल मजबूत किया जाए। यह वारदात न केवल धार्मिक धरोहर की चोरी का मामला है, बल्कि बिहार में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनका जवाब अब प्रशासन को देना ही होगा।






















