Chhapra human trafficking: छपरा जंक्शन पर हुई एक सतर्क कार्रवाई ने मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। रेलवे सुरक्षा बल और सीआईबी की संयुक्त टीम ने कर्मभूमि एक्सप्रेस से पंजाब ले जाए जा रहे आठ नाबालिग बच्चों को सुरक्षित उतारकर बड़ी अनहोनी टाल दी। यह मामला सिर्फ बच्चों की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि कैसे गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाकर मासूमों को बाल मजदूरी की दलदल में धकेलने की कोशिश की जा रही थी।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के तहत चल रहे विशेष अभियान के दौरान की गई। वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के निर्देशन में छपरा जंक्शन पर पहले से निगरानी बढ़ा दी गई थी। गोपनीय सूचना मिली थी कि एक ट्रेन से नाबालिग बच्चों को दूसरे राज्य ले जाया जा रहा है। जैसे ही कर्मभूमि एक्सप्रेस स्टेशन पर पहुंची, आरपीएफ और सीआईबी की टीम ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। कुछ ही देर में तीन ऐसे व्यक्ति चिन्हित किए गए जो आठ बच्चों के साथ सफर कर रहे थे और उनके जवाब संतोषजनक नहीं लग रहे थे।
पूछताछ में जो सच्चाई सामने आई, उसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। तस्करों ने स्वीकार किया कि बच्चों को पंजाब के जालंधर जिले में आलू की खेती में मजदूरी कराने के लिए ले जाया जा रहा था। बच्चों के परिजनों को पांच-पांच हजार रुपये अग्रिम देकर उन्हें बहला-फुसलाया गया था। इस पूरे नेटवर्क में यह कोशिश की गई थी कि इसे सामान्य यात्रा दिखाया जाए, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन तकनीकी निगरानी और मानवीय सतर्कता ने इस योजना को बीच रास्ते ही तोड़ दिया।
बरामद किए गए सभी बच्चे पूर्णिया और कटिहार जिलों के रहने वाले हैं और उनकी उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इतनी कम उम्र में रोजी-रोटी के नाम पर उन्हें सैकड़ों किलोमीटर दूर ले जाना यह दिखाता है कि मानव तस्करी का नेटवर्क किस हद तक संगठित और निर्दयी होता जा रहा है। यह भी सामने आया है कि यह पहली बार नहीं था जब इस तरह की कोशिश की गई हो, बल्कि जांच एजेंसियों को आशंका है कि इससे पहले भी कई बच्चों को इसी तरह दूसरे राज्यों में भेजा गया होगा।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान कटिहार, पूर्णिया और मधेपुरा जिलों के रहने वाले युवकों के रूप में हुई है। उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जीआरपी थाना छपरा जंक्शन को सौंप दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह के पीछे और कौन लोग शामिल हैं तथा इसका नेटवर्क किन-किन जिलों और राज्यों तक फैला है। मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
बचाए गए सभी नाबालिग बच्चों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप दिया गया है, ताकि उन्हें सुरक्षित आश्रय, काउंसलिंग और उनके परिवारों तक वापस पहुंचाने की व्यवस्था की जा सके।






















