छपरा शहर में सनसनी फैलाने वाले चर्चित अपहरण कांड (Chhapra Kidnapping Case) का आखिरकार पर्दाफाश हो गया है। सारण पुलिस ने तेज़ कार्रवाई और सटीक रणनीति के जरिए इस मामले की गुत्थी सुलझाते हुए न सिर्फ अपराधियों को बेनकाब किया, बल्कि उस साजिश का भी खुलासा किया जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। इस केस में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि अपहरण और हत्या की साजिश किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि पीड़ित के साथ रहने वाले एक डॉक्टर ने ही रची थी।
पुलिस मुठभेड़ के दौरान दो बदमाशों के पैर में गोली लगने के बाद कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि एनेस्थेटिक डॉक्टर एस.एन. सिंह ही इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड था, जिसने अपने पेशे और भरोसे की आड़ में खौफनाक योजना को अंजाम देने की तैयारी की। पुलिस के अनुसार, आरोपी डॉक्टर ने आर्थिक लालच में आकर करीब एक करोड़ रुपये की फिरौती वसूलने के उद्देश्य से अपहरण की साजिश रची थी।
प्रेस वार्ता में एसएसपी डॉ. कुमार आशीष ने बताया कि गिरफ्तार अपराधियों के स्वीकारोक्ति बयान से पूरी कहानी सामने आई है। आरोपियों ने खुलासा किया कि डॉक्टर एस.एन. सिंह ने ही पूरा मास्टर प्लान तैयार किया, अपराधियों को हायर किया और वारदात को अंजाम देने के लिए संसाधन मुहैया कराए। यह तथ्य सामने आने के बाद पुलिस भी चौंक गई, क्योंकि आरोपी डॉक्टर पीड़ित के बेहद करीब था और उसी भरोसे का उसने फायदा उठाया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नगर थाना क्षेत्र के दहियांवा निवासी रंजन राय, अवतार नगर थाना क्षेत्र के सोनू राय, पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र अंतर्गत ईस्ट बोरिंग कैनाल रोड निवासी डॉक्टर एस.एन. सिंह उर्फ शिवनारायण सिंह, हरियाणा के बल्लभगढ़ निवासी उसका कर्मी मोंटी भारती और छपरा नगर थाना क्षेत्र के साहेबगंज निवासी धीरज गिरी शामिल हैं। मुठभेड़ के दौरान रंजन राय और सोनू राय के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो देसी कट्टा, एक पिस्तौल, दो जिंदा कारतूस और पांच खोखा बरामद किए हैं। इस बरामदगी से साफ है कि वारदात को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी की गई थी। एसएसपी ने कहा कि यह केस पुलिस की प्रोफेशनल जांच और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण है, जिससे अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और आम जनता में कानून के प्रति भरोसा मजबूत होगा।






















