छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में स्थित एक स्टील प्लांट (Chhattisgarh Steel Plant) में हुए कोयला भट्ठा विस्फोट ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत को उजागर कर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में बिहार के गया जिले के छह प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसे की खबर मिलते ही गया जिले के डुमरिया थाना क्षेत्र के गोटीबांध गांव में मातम पसर गया है और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सभी मृतक रोज़गार की तलाश में छत्तीसगढ़ गए थे और बलौदाबाजार स्थित स्टील प्लांट में हेल्पर के रूप में काम कर रहे थे। मृतकों की पहचान श्रवण कुमार और राजदेव कुमार, दोनों की उम्र 22 वर्ष, जितेंद्र 37 वर्ष, बदरी भुइयां 42 वर्ष, विनय भुइयां 40 वर्ष और सुंदर भुइयां 40 वर्ष के रूप में हुई है। ये सभी गया जिले के गोटीबांध गांव के निवासी थे, जिससे एक ही गांव पर इस हादसे का सबसे गहरा असर पड़ा है।
हादसे में गया के ही कल्पू भुइयां और रामू भुइयां गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है। इसके अलावा झारखंड के तीन मजदूर शबीर अंसारी, मुमताज अंसारी और शराफत अंसारी भी इस विस्फोट में जख्मी हुए हैं। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रत्यक्षदर्शी मजदूर जोगेंद्र राम ने बताया कि वे लोग भट्ठे के पास हेल्पर का काम कर रहे थे। सुबह करीब दस बजे अचानक कोयला भट्ठे से तेज धुआं निकलने लगा। कुछ ही पलों में अफरा-तफरी मच गई और सुपरवाइजरों ने भागने के लिए कहा, लेकिन इससे पहले ही जोरदार विस्फोट हो गया। मजदूरों का कहना है कि प्लांट में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था और खतरे के संकेत पहले से मौजूद थे।
इस हादसे ने एक बार फिर देश में प्रवासी मजदूरों की कार्य स्थितियों और औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रोज़ी-रोटी की मजबूरी में दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूर अक्सर जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं, जहां सुरक्षा इंतजाम कागजों तक सीमित रहते हैं। स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर समय रहते निरीक्षण क्यों नहीं किया गया।


















