बिहार की राजनीति में अगले पांच वर्षों की दिशा और गठबंधन की मजबूती को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान (Chirag Paswan Statement) ने एक निजी न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में ऐसे बयान दिए हैं, जो न केवल मौजूदा सियासी समीकरणों को परिभाषित करते हैं बल्कि आने वाले समय के संकेत भी देते हैं। चुनावी नतीजों के बाद एनडीए की एकजुटता, विपक्ष की रणनीति और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चिराग का यह बयान सियासी विमर्श के केंद्र में आ गया है।
चिराग पासवान ने हालिया चुनावी जीत को एनडीए की सामूहिक ताकत का नतीजा बताते हुए कहा कि जब गठबंधन पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरता है तो उसका असर सीधा नतीजों पर दिखता है। उनके मुताबिक, बिखरे हुए एनडीए के दौर में विपक्ष खासतौर पर आरजेडी को फायदा मिला, लेकिन इस बार तस्वीर बदल गई। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन की राजनीति में छोटे दलों की भूमिका को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, जबकि सीटों के बंटवारे और रणनीतिक फैसलों में यही दल संतुलन का काम करते हैं। उन्होंने पूर्व के उदाहरणों का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह असंतुलित सीट शेयरिंग का खामियाजा गठबंधन को भुगतना पड़ा।
डिप्टी सीएम पद को लेकर चल रही अटकलों पर चिराग पासवान ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी कोई शर्त न पहले थी और न अब है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि एनडीए में उनकी मौजूदगी सत्ता या पद की आकांक्षा से नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनके भरोसे से जुड़ी है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री का नेतृत्व उनके लिए प्रेरणा का केंद्र है और वही उनकी राजनीतिक दिशा तय करता है।
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कांग्रेस के साथ कथित बैठक की चर्चाओं को चिराग ने सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक राजनीतिक नेरेटिव बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें करीब से जानते हैं, वे यह समझते हैं कि ऐसी किसी बैठक की संभावना ही नहीं है। उनका यह बयान उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो विपक्षी खेमे में संभावित सियासी हलचलों को लेकर फैल रही थीं।
नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी को लेकर पूछे गए सवाल पर चिराग पासवान ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उत्तराधिकारी तय करना जदयू का आंतरिक विषय है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि आने वाले पांच साल तक बिहार सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही काम करेगी। यह बयान एनडीए के भीतर नेतृत्व को लेकर स्थिरता का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा पर चिराग पासवान ने चर्चा को एक अलग ही दिशा दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का उनका मूल उद्देश्य बिहार है। एक सांसद के तौर पर लंबे अनुभव के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि अगर बिहार को “बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट” बनाना है तो राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने प्रवास की मजबूरी झेल रहे बिहारी युवाओं का जिक्र करते हुए इसे अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया। अपनी पार्टी के साथ रिश्ते को भावनात्मक शब्दों में बयां करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी उनके लिए मां के समान है। कठिन हालात में पार्टी को संभालना उनके राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी परीक्षा रही है।






















