दिल्ली में मकर संक्रांति के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज ने इस बार सिर्फ रस्मों और मेल-जोल तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बिहार से लेकर बंगाल तक की राजनीति पर चर्चा का बड़ा मंच बन गया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने इस मौके पर विपक्ष पर ऐसा प्रहार बोला, जिसने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी। भोज के दौरान चिराग पासवान ने बिहार में विपक्ष की भूमिका, कांग्रेस व राजद के अंदरूनी हालात और बंगाल की मौजूदा सियासत को खुलकर निशाने पर लिया।
बिहार की राजनीति पर बोलते हुए चिराग पासवान ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के ‘100 दिनों की चुप्पी’ वाले बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत ही उसकी आवाज है, और यदि वही आवाज खामोश कर दी जाए, तो जनता की लड़ाई कौन लड़ेगा? उन्होंने सवाल उठाया कि यदि तेजस्वी यादव को चुप्पी साधनी थी, तो नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी किसी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए थी, जो प्रभावी ढंग से विपक्ष की भूमिका निभा सके।
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चिराग पासवान ने कांग्रेस की आंतरिक स्थिति को भी कटाक्ष के माध्यम से उजागर किया। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम द्वारा आयोजित भोज में विधायकों की गैर मौजूदगी को ‘संदेशवाहक संकेत’ करार दिया और कहा कि जब विधायकों का अपनी ही पार्टी के कार्यक्रम से दूरी बनाना शुरू हो जाए, तो यह साफ हो जाता है कि असंतोष की जड़ें कितनी गहरी हैं। उनके अनुसार कांग्रेस और राजद दोनों दलों में गठबंधन को लेकर बेचैनी और दबी नाराजगी धीरे-धीरे सतह पर आ रही है, जो आने वाले वक्त में बड़े राजनीतिक बदलावों का संकेत दे सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने भाषा की राजनीति को भी नसीहत भरे शब्दों में संबोधित किया और कहा कि भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी समझा जाना चाहिए। उन्होंने उन नेताओं पर हमला किया जो विदेशी भाषाओं को प्रतिष्ठा का प्रतीक मानते हैं, जबकि भारतीय भाषाओं के सम्मान पर दोहरी सोच अपनाते हैं। चिराग ने दावा किया कि केंद्र की सरकार समावेशी नीति और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विचार के साथ काम कर रही है, जिसमें भाषा के आधार पर भेदभाव की कोई जगह नहीं है।
बात सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रही, पश्चिम बंगाल की सियासत भी इस बहस का अहम हिस्सा बनी। केंद्रीय एजेंसियों पर हुए हमलों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रुख को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर चोट बताते हुए चिराग पासवान ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री को स्वयं एजेंसियों के सामने खड़े होकर टकराव का संदेश नहीं देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो इतनी बेचैनी और टकराव की जरूरत क्यों? चिराग ने दावा किया कि बंगाल में इस बार एनडीए मजबूत स्थिति में है और जनता बदलाव की ओर झुकाव दिखा रही है।






















