गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) का बयान राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत न तो जाति के आधार पर चलेगा और न ही धर्म के नाम पर, बल्कि देश का संचालन केवल और केवल संविधान के अनुसार होगा। उनके इस वक्तव्य ने ऐसे समय में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, जब पहचान की राजनीति और सामाजिक ध्रुवीकरण पर बहस तेज है।
चिराग पासवान ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प दोहराने का अवसर है। उन्होंने संविधान में निहित मूल्यों के शत-प्रतिशत पालन की प्रतिबद्धता जताते हुए यह भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी और सरकार संविधान की मर्यादाओं से बंधी है। उनके अनुसार, भारत की विविधता उसकी ताकत है और अलग-अलग जाति, पंथ और धर्म के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए ही लोकतंत्र मजबूत हो सकता है।
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अपने संदेश में उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और बंधुत्व का जीवंत आधार है। चिराग पासवान का कहना था कि जब तक नीतियां और शासन व्यवस्था संविधान की भावना के अनुरूप नहीं होंगी, तब तक लोकतांत्रिक आदर्शों को जमीन पर उतारना संभव नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने एक बार फिर यह संकल्प दोहराने की अपील की कि संविधान सर्वोच्च है और उसी के अनुसार देश आगे बढ़ेगा।






















