केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने वक्फ़ संशोधन बिल पर कहा कि 2013 तक इसमें संशोधन होते रहे हैं लेकिन तब तो किसी ने उसमें भ्रम फैलाने का काम नहीं किया। आज भ्रम फैलाया जा रहा है कि यह बिल मुसलमान विरोधी है या अंसवैधानिक है। क्या भारत की संसद में कोई असंवैधानिक चीज आ सकती है? जो संशोधन हुआ है वह इस सोच के साथ किया गया है कि कैसे इसे और शक्तियां प्रदान की जाएं या जो लोग जिनके साथ अन्याय हो रहा है कैसे उन्हें न्याय दिलाया जाए।
आज अगर किसी को इस बिल से परेशानी हो रही है तो यह वह लोग हैं जो इसमें भ्रष्टाचार करते हैं, गरीब मुसलमानों से उनका अधिकार छीनते हैं। शुरूआत में हमें भी कुछ समस्याएं थीं और पार्टी की ओर से (JPC के समक्ष) सुझाव दिए गए। विपक्ष चाहते ही नहीं कि गरीब मुसलमान आगे आएं।
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इससे पहले भी CAA के समय इसी तरह का भ्रम फैलाया गया था। एक नागरिकता देने वाले कानून को नागरिकता छीनने वाले कानून के रूप में बनाकर देश भर में आगजनी का माहौल बनाया गया। ये लोग केवल बंटवारे की राजनीति करके भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। पारदर्शिता लाने की दृष्टि के साथ यह संशोधन किए गए हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इस बिल का समर्थन करती है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ़ बोर्ड संशोधन विधेयक पेश कर दिया। राज्यसभा में यह गुरुवार को पेश किया जाएगा। वक्फ़ बिल पेश करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि इससे अधिक संख्या में आज तक किसी भी बिल पर लोगों की याचिकाएं नहीं आईं। 284 डेलिगेशन ने अलग-अलग कमेटी के सामने अपनी बात रखी। 25 राज्यों के वक्फ बोर्ड ने अपना पक्ष रखा। पॉलिसी मेकर्स, विद्वानों ने भी अपनी बात कमेटी के सामने रखी हैं। इस बिल का पॉजिटिव सोच के साथ विरोध करने वाले भी समर्थन करेंगे।

किरेन रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक में वक्फ बोर्ड के किसी भी धार्मिक काम में सरकार की ओर किसी हस्तक्षेप की योजना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वक्फ बोर्ड ने दिल्ली के एयरपोर्ट और वसंत विहार पर भी अपना दावा पेश किया था। बिल नहीं लाते तो संसद की वक्फ की संपत्ति होती। हम किसी मस्जिद के मैनेजमेंट को नहीं छेड़ेंगे।
किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक कार्यकलाप में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है। हम किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे। इस पर विपक्ष की ओर से किसी ने टिप्पणी की। स्पीकर ओम बिरला ने टोकते हुए नसीहत दी कि भारत की संसद में बैठे हो, गरिमा का ध्यान रखो। किसी भी व्यक्ति को बैठे-बैठे टिप्पणी का अधिकार नहीं है। किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि ये मस्जिद या धार्मिक क्रियाकलापों से जुड़ा मामला नहीं है। ये बस एक संपत्ति के मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। कोई मुसलमान जकात देता है तो उसे पूछने वाले हम कौन होते हैं। हम तो बस उसके मैनेजमेंट से जुड़ी बात कर रहे हैं। इसका धार्मिक व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है।
किरेन रिजिजु ने कहा कि वक्फ की प्रोपर्टी निजी संपत्ति मानी जाती है। दुनिया से सबसे अधिक वक्फ प्रोपर्टी भारत में है। ऐसे में भारत का मुसलमान इतना गरीब क्यों है। किरेन रिजिजु ने कहा कि अब वक्फ बोर्ड में 10 मुस्लिम सदस्य होंगे। इसमें तीन सांसद भी होंगे। इसमें चार से ज्यादा गैर मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकते हैं। किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ निजी संपत्ति है। रेलवे या सेना की संपत्ति से इसकी तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि ये सार्वजनिक संपत्ति हैं। वक्फ संपत्ति का इस्तेमाल गरीब मुसलमानों के उत्थान के लिए क्यों नहीं किया जा रहा है? अगर मोदी सरकार उनके लिए कुछ कर रही है तो आप इस पर आपत्ति क्यों कर रहे हैं?
किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक का नाम अब ‘उम्मीद’ रखा गया है। इसमें संसदीय समिति के कई सुझावों को शामिल किया है। यह कहना गलत है कि संसदीय सिमित के सुझाव को नहीं माना गया है। गरीब मुस्लिम लोग कह रहे हैं कि इस बिल को जल्दी पास करना चाहिए। वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम कैसे आएंगे। इस बारे में किरेन रिजिजू कहा कि जैसे हम एक नागरिक सासंद चुनकर आए हैं। वक्फ बोर्ड भी एक ट्रस्ट है और कोई कैसे कह सकता है कि उसमें दूसरे धर्म के लोग नहीं आएंगे।