बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस (Congress Bihar) पूरी तरह मंथन मोड में दिख रही है। इसी कड़ी में शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लंबी मुलाकात की, जिसमें बिहार की चुनावी रणनीति, हार के कारण और संगठन में संभावित बदलाव जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब राज्य की कांग्रेस इकाई अंदरूनी मतभेदों और नेतृत्व संकट से जूझ रही है। बैठक के बाद पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार कांग्रेस में अहम फेरबदल और संगठनात्मक सुधार जल्द शुरू किए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी सीधे कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पहुंचे, जहां बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम भी पहले से मौजूद थे। बैठक में बिहार चुनाव की समीक्षा की गई और प्रत्याशियों से मिलकर उनकी राय जानने पर भी जोर दिया गया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले इंदिरा भवन में राहुल और खड़गे ने बिहार के सभी कांग्रेस प्रत्याशियों और वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत की थी, ताकि चुनावी हार के वास्तविक कारणों को समझा जा सके।
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चर्चा के दौरान जिन बिंदुओं को हार की बड़ी वजह माना गया, उनमें सबसे प्रमुख था एनडीए द्वारा महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये की विशेष प्रोत्साहन योजना का वादा, जिसने वोटरों को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह, टिकट बंटवारे में देरी और चुनाव प्रचार में सामंजस्य की कमी को भी हार के महत्वपूर्ण कारण माना गया। कई प्रत्याशियों ने बैठक में साफ कहा कि संगठनात्मक असंगति और कमजोर ग्राउंड मैनेजमेंट ने चुनावी अभियान को कमजोर किया।
बैठक का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम अचानक पार्टी अध्यक्ष खड़गे के पास अपना इस्तीफा लेकर पहुंचे। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने खड़गे को कहा कि हार की नैतिक जिम्मेदारी वे स्वयं लेते हैं। खड़गे ने मुस्कुराते हुए इस्तीफा राहुल गांधी को देने के लिए कहा। जब राजेश राम राहुल गांधी के सामने पहुंचे और पत्र सौंपा, तो राहुल ने उसे पढ़ने के बाद शांत स्वर में कहा कि ‘अभी इसे रखिए, बाद में देखेंगे।’






















