Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद महागठबंधन की अंदरूनी दरार अब खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और बयानबाजी ऐसी दिशा में बढ़ती दिख रही है, जो आने वाले समय में गठबंधन की राजनीति को और कमजोर कर सकती है। हार की जिम्मेदारी तय करने की जंग में दोनों दल एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे बिहार की सियासत में नया उबाल आ गया है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद के बयान ने इस सियासी टकराव को हवा दी। उन्होंने साफ कहा कि राजद के साथ गठबंधन कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर आत्ममंथन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन राजद ने इसे सीधे अपने नेतृत्व और संगठन पर हमला माना। शकील अहमद के बयान के बाद राजद की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह दी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस का जनाधार लगातार क्यों गिरता जा रहा है। उनके मुताबिक बिहार में कांग्रेस का कोई स्वतंत्र आधार नहीं बचा है और पार्टी राजद के सहारे ही चुनावी जीत दर्ज करती रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक कह दिया कि इस तरह की राजनीति और बयानबाजी से कांग्रेस एक दिन विलुप्त हो सकती है। इस टिप्पणी ने महागठबंधन के भीतर तल्खी को और गहरा कर दिया है।
इधर, राबड़ी आवास से जुड़ी सियासत के बीच राजद ने जदयू के दो सांसदों को मिले सरकारी आवास का मुद्दा उठाकर राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर यादव ने भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखकर सवाल किया है कि राज्यसभा सांसद संजय झा और लोकसभा सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर अब भी बिहार सेंट्रल पुल के सरकारी आवास पर किस नियम और परिस्थिति में काबिज हैं। राजद का कहना है कि ये आवास उन्हें मंत्री और सभापति रहने के दौरान आवंटित किए गए थे, लेकिन पद बदलने के बावजूद अब तक खाली नहीं कराए गए हैं।
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राजद ने यह भी पूछा है कि आखिर किस नियम के तहत इन आवासों को अब तक खाली नहीं कराया गया और क्या राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर सरकारी बंगले पर कब्जा बनाए रखा गया है। इस मामले में भवन निर्माण विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। एक तरफ महागठबंधन के भीतर बयानबाजी तेज है, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सरकारी आवास को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है।






















