वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत नए जवाबी टैरिफ लागू कर दिए हैं, लेकिन इस बार उनकी सूची में एक बड़ा ट्विस्ट देखने को मिला है। जिन देशों पर ट्रंप सबसे ज्यादा नाराजगी जता रहे थे—कनाडा और मैक्सिको—उन्हें इस बार टैरिफ की मार से छूट दे दी गई है। यह फैसला कई लोगों के लिए हैरान करने वाला है, क्योंकि ट्रंप ने पहले इन दोनों देशों को फेंटेनाइल तस्करी और अवैध प्रवास के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त टैरिफ लगाए थे।
कनाडा और मैक्सिको को क्यों मिली राहत?
व्हाइट हाउस ने इस फैसले के पीछे की वजह साफ करते हुए कहा कि कनाडा और मैक्सिको को यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के तहत छूट दी गई है। यह समझौता ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में लागू किया था, जो उत्तरी अमेरिका में मुक्त व्यापार को बढ़ावा देता है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया, “USMCA के तहत आने वाले सामानों पर 0% टैरिफ लागू रहेगा, लेकिन गैर-USMCA सामानों पर 25% और ऊर्जा उत्पादों पर 10% टैरिफ लगेगा।” इसका मतलब है कि कनाडा और मैक्सिको से आने वाले ज्यादातर आयात, जो इस समझौते के दायरे में हैं, टैरिफ-मुक्त रहेंगे। इसके अलावा, मार्च 2025 में कनाडा और मैक्सिको ने फेंटेनाइल तस्करी और अवैध प्रवास रोकने के लिए ठोस कदम उठाए थे।
मैक्सिको ने 29 ड्रग कार्टेल सरगनाओं को अमेरिका प्रत्यर्पित करने पर सहमति दी, जबकि कनाडा ने अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत किया। इन कदमों के बाद ट्रंप ने इन देशों को राहत दी थी, जिसमें USMCA सामानों पर टैरिफ को 2 अप्रैल तक स्थगित करना शामिल था। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इन देशों के साथ मौजूदा समझौतों को बरकरार रखना चाहते हैं, ताकि ऑटोमोबाइल और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी सप्लाई चेन को नुकसान न हो।
नए टैरिफ का दायरा: विदेशी कारों पर 25% कर
ट्रंप ने इस बार सभी विदेशी निर्मित ऑटोमोबाइल और पार्ट्स पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो आज से लागू हो गया है। हालांकि, कनाडा में असेंबल किए गए वाहनों पर यह टैरिफ केवल गैर-अमेरिकी सामग्री वाले हिस्सों पर लागू होगा। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देगा और व्यापार घाटे को कम करेगा, जो पिछले साल 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया था।
क्या होगा असर?
अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि ये टैरिफ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भारी पड़ सकते हैं। टैक्स फाउंडेशन के एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, टैरिफ से आयात तो कम होगा, लेकिन निर्यात पर भी असर पड़ेगा, जिससे व्यापार घाटे में मामूली कमी आएगी, लेकिन जीडीपी को लंबे समय तक नुकसान होगा। इसके अलावा, अमेरिकी परिवारों को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर ऑटोमोबाइल सेक्टर में।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ट्रंप के इस कदम से वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है। यूरोपीय संघ ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, “हम प्रतिशोध नहीं चाहते, लेकिन जरूरत पड़ी तो हमारे पास ठोस योजना है।” वहीं, अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस फैसले की आलोचना की है। प्रतिनिधि सभा की सदस्य सुसान डेलबेने ने इसे “अमेरिकी परिवारों पर छुपा हुआ टैक्स” करार दिया।
ट्रंप का टैरिफ एजेंडा: अब तक का सफर
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही टैरिफ को अपनी नीति का मुख्य हथियार बनाया है। फरवरी 2025 में उन्होंने कनाडा और मैक्सिको पर 25% और चीन पर 10% टैरिफ लगाए थे। मार्च में इन्हें लागू किया गया, जिसके जवाब में कनाडा और मैक्सिको ने भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ लगाए। इस बार की टैरिफ सूची में चीन पर 34%, भारत पर 26%, यूरोपीय संघ पर 20%, दक्षिण कोरिया पर 25%, जापान पर 24%, और ताइवान पर 32% टैरिफ शामिल हैं। लेकिन कनाडा और मैक्सिको को छूट देकर ट्रंप ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है।
यह कदम ट्रंप की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें वह अपने करीबी सहयोगियों को राहत देकर वैश्विक व्यापार में अमेरिका की स्थिति को मजबूत करना चाहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह रणनीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाएगी, या इससे वैश्विक व्यापार युद्ध और तेज होगा? यह देखना अभी बाकी है।