वर्तमान से पूर्व मंत्री बने कार्तिक कुमार की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। गुरुवार को वे कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए हाजिर हुए। पटना के दानापुर स्थित व्यवहार न्यायालय में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, तृतीय के कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए उपस्थित हुए। उन पर बिहटा थाना के कांड संख्या 859/ 2014 के मामला दर्ज है।
अपहरण के मामले में आरोपी
मोकामा के बाहुबलि विधायक अनंत सिंह के साथ कार्तिक कुमार पर भी एक अपहरण का मामला दर्ज है। मामला 2014 का है, जिसमें आरोप है कि इन लोगों ने बिहटा में राजू सिंह का अपहरण किया था। इस मामले में बिहटा थाने में FIR भी दर्ज है। कार्तिक कुमार के खिलाफ वारंट भी निकला था। उन्हें कोर्ट में सरेंडर करना था। इसके लिए उन्हें 16 अगस्त तक कोर्ट में हाजिर होना था। लेकिन बदली राजनीतिक परिस्थितियों में कार्तिक कुमार एलएलसी से मंत्री बन गए। वैसे तो मंत्री बनने से पहले 12 अगस्त को ही कोर्ट से कार्तिक कुमार को एक सितंबर तक के लिए राहत मिली। लेकिन विवाद इस पर शुरू हुआ कि जब वारंट निकला हुआ है तो मंत्री कैसे बन गए।
मंत्रालय बदला तो मंत्री पद से दिया इस्तीफा
बिहार में महागठबंधन की सरकार बनाने के बाद उन्हें कानून मंत्री बनाया गया था। उसके बाद से ही वो विपक्ष के निशाने पर थे। क्योंकि जिस वक्त उन्हें कोर्ट में हाजिर होने था उस वक्त वो मंत्री पद की शपथ ले रहे थे। मामला बढ़ता देख बीते दिन 31 अगस्त को उन्हें कानून मंत्री के पद से हटा कर गन्ना उधोग मंत्री बनाया गया था। पर शाम होते होते उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंप दिया।
पहली बार में ही MLC से मंत्री
कार्तिक कुमार मोकामा के रहने वाले हैं। 2022 में ही स्थानीय निकाय से राजद के टिकट पर एमएलसी बने हैं। पहली ही बार में विधान परिषद का रास्ता तय करने वाले कार्तिक कुमार को मंत्री परिषद में भी जगह मिल गई। नीतीश कुमार ने पहले उन्हें विधि विभाग का जिम्मा सौंपा था। बुधवार को विभाग बदल गया। उन्हें विधि विभाग से गन्ना उद्योग विभाग में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन बुधवार को ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।




















