Dayanidhi Maran case: डीएमके सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उत्तर भारत की महिलाओं और उनकी शिक्षा को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद अब मामला सियासी बहस से निकलकर न्यायिक दायरे में पहुंच गया है। मारन के खिलाफ शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-प्रथम पश्चिमी की अदालत में परिवाद दाखिल किया गया, जिसे अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने दर्ज कराया है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख तय की है।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि दयानिधि मारन ने जानबूझकर ऐसा बयान दिया, जो न सिर्फ उत्तर भारत की महिलाओं का अपमान करता है बल्कि देश में क्षेत्रीय और सामाजिक विभाजन को भी बढ़ावा देता है। शिकायत के अनुसार, डीएमके सांसद ने लड़कियों की शिक्षा को लेकर बेहद आपत्तिजनक और असंवेदनशील टिप्पणी की, जिससे बिहार समेत पूरे उत्तर भारत की महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंची है।
अधिवक्ता सुधीर ओझा का कहना है कि मारन का बयान सामान्य राजनीतिक आलोचना नहीं बल्कि एक पूरे क्षेत्र की महिलाओं को हीन बताने वाला है। यही कारण है कि उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। परिवाद में यह भी कहा गया है कि इस तरह की टिप्पणियां समाज में वैमनस्य पैदा करती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं।
दरअसल, 14 जनवरी को चेन्नई में आयोजित एक सभा के दौरान दयानिधि मारन ने दावा किया था कि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाया जाता है, जबकि उत्तर भारत में उन्हें शिक्षा और काम से वंचित रखा जाता है और उनका दायरा सिर्फ घर और बच्चे पैदा करने तक सीमित कर दिया गया है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव का माहौल बन रहा है, जिससे इसे राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मारन के बयान के बाद उत्तर भारत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना हुई। अब यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया है।
















