दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडिगो एयरलाइन संकट (IndiGo Crisis) पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर हालात इस कदर बिगड़ने क्यों दिए गए। अदालत ने किरायों में भारी उछाल, बदइंतज़ामियों और एयरक्राफ्ट–क्रू मैनेजमेंट में गंभीर खामियों पर सवाल उठाया। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ ऐसे समय आई हैं जब बुधवार को भी इंडिगो की 300 से अधिक फ्लाइट्स रद्द या री-शेड्यूल हुईं, जिससे लाखों यात्रियों को कठिनाई का सामना करना पड़ा।
अदालत में दाखिल याचिका में केंद्र और इंडिगो को निर्देश देने की मांग की गई है ताकि स्थिति सामान्य हो सके और फंसे यात्रियों को राहत मिल सके। याचिका पर सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट कहा कि इंडिगो की समस्या सिर्फ एयरलाइन तक सीमित नहीं रही बल्कि इसका व्यापक असर पूरी अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत पर पड़ा है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब किराया 4–5 हजार से बढ़कर 30–40 हजार रुपए तक पहुंच गया तब केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया।
एएसजी ने अदालत को बताया कि सरकार ने किराए पर सख्त कैप लगाया है और इंडिगो को सिर्फ फरवरी 2026 तक सीमित समय के लिए छूट दी गई है। लेकिन अदालत का सवाल यह था कि ऐसी स्थिति बनने ही क्यों दी गई जिसमें अन्य एयरलाइंस को भी मनमाने किराए वसूलने की छूट जैसा माहौल बन गया।
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इसी बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने डीजीसीए की सिफारिशों के आधार पर इंडिगो के विंटर शेड्यूल को 10% कम करने का आदेश दिया है। मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि एयरलाइन अपने एयरक्राफ्ट, क्रू और पायलट मैनेजमेंट में विफल रहा, जिसके कारण बड़े पैमाने पर कैंसेलेशन, बैगेज देरी और ऑपरेशनल दिक्कतें सामने आईं। डीजीसीए ने भी संशोधित शो-कॉज नोटिस जारी करते हुए एयरपोर्ट्स पर सीधी निगरानी आरंभ कर दी है।
दूसरी ओर, एयरलाइन का दावा है कि नेटवर्क स्थिर करने के प्रयास जारी हैं और फ्लाइट्स को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त क्रू शेड्यूलिंग व ऑपरेशनल सुधार किए जा रहे हैं। हालांकि, लगातार कैंसलेशन की वजह से यात्री अफरातफरी से बचने के लिए एयरपोर्ट कम पहुंचे, जिससे टर्मिनल्स पर भीड़ की स्थिति सामान्य रही।






















