Red Fort Blast Case: दिल्ली के लाल किला परिसर के बाहर 10 नवंबर को हुए भीषण कार बम धमाके की जांच लगातार नई परतें खोल रही है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने बुधवार को इस केस में सातवें आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। ताजा गिरफ्तारी फरीदाबाद के धौज निवासी सोयब की हुई है, जिसे एजेंसी ने सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर नबी को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के आरोप में पकड़ा है। जांच में सामने आया है कि धमाके से पहले आतंकियों के मूवमेंट, वाहनों की व्यवस्था और ठिकानों की शिफ्टिंग में सोयब की अहम भूमिका रही। लाल किले के पास हुए इस धमाके में 13 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी जबकि कई लोग घायल हुए थे, जिससे घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को झकझोर दिया था।
जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होता गया कि धमाका किसी साधारण मॉड्यूल का नतीजा नहीं था, बल्कि इसमें कई राज्यों और पेशों से जुड़े लोग सक्रिय रूप से शामिल थे। NIA ने 20 नवंबर को चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें पुलवामा के डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, अनंतनाग के डॉ. अदील अहमद राथर, लखनऊ के डॉ. शाहीन सईद और शोपियां के मुफ्ती इरफान अहमद वागे शामिल हैं। इन सभी को कोर्ट के प्रोडक्शन ऑर्डर पर श्रीनगर में हिरासत में लिया गया था। इन चारों पर हमले की प्लानिंग, फंडिंग और उसे अंजाम देने की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने का आरोप है।
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि कई मेडिकल प्रोफेशनल्स इस मॉड्यूल से जुड़े मिले, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को एक नए पैटर्न के प्रति सतर्क किया है। GMC अनंतनाग में डॉ. अदील को आवंटित एक लावारिस लॉकर से AK-47 राइफल मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर के अस्पतालों में बारीकी से जांच शुरू की गई। इससे यह आशंका और गहरी हो गई कि मॉड्यूल का नेटवर्क कितना व्यापक, प्रशिक्षित और रणनीतिक हो सकता है।
NIA ने यह भी बताया कि गिरफ्तार आरोपी न केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट में शामिल थे, बल्कि सुसाइड बॉम्बर के लिए एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, सुरक्षित रास्तों का चयन और आइडियोलॉजिकल ग्रूमिंग जैसे बेहद संवेदनशील काम भी संभाल रहे थे। बॉम्बर ने हमले से पहले कई वीडियो रिकॉर्ड किए थे जिनमें वह इस हमले को “ justified mission” बताने का प्रयास करता दिखा, जो उसकी मानसिक और तकनीकी तैयारी को दर्शाता है।
इससे पहले एजेंसी ने आमिर राशिद अली, जिसके नाम पर धमाके में इस्तेमाल कार रजिस्टर्ड थी और जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया था, जिसने तकनीकी सपोर्ट दिया था। गृह मंत्रालय के निर्देश पर NIA ने हमला होते ही केस की कमान संभाली और फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है।






















