भारत की राजनीति और न्यायिक प्रणाली से जुड़े चर्चित देवघर चारा घोटाला मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पूर्व बिहार मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Yadav Bail Case) को मिली जमानत को चुनौती देते हुए कड़ा रुख अपनाया. अदालत में हुई बहस के दौरान कानूनी तर्कों के साथ-साथ तीखी टिप्पणियां भी देखने को मिलीं, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अप्रैल तक स्थगित कर दी. यह मामला सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि बिहार की राजनीति और भ्रष्टाचार मामलों की न्यायिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है.
देवघर कोषागार से जुड़े चारा घोटाला मामले में सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि सजा निलंबित करने में कानून का गलत इस्तेमाल हुआ है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं बल्कि कानून के सिद्धांतों से जुड़ा प्रश्न है और अदालत को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. सीबीआई का तर्क था कि पोस्ट-कन्विक्शन यानी दोषसिद्धि के बाद दी गई जमानत कानूनी रूप से उचित नहीं है और इस आदेश को अवैध बताया जाना चाहिए.
इसके जवाब में लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले में कई आरोपी हैं और अभी सभी पक्षों को नोटिस तक नहीं मिला है. कुछ आरोपियों ने सीबीआई की अपील पर जवाब भी दाखिल नहीं किया है, इसलिए जल्दबाजी में सुनवाई करना उचित नहीं होगा. उन्होंने अदालत से कहा कि प्रक्रिया पूरी होने तक मामले को संतुलित तरीके से देखा जाए और अनावश्यक उत्तेजना से बचा जाए.
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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों पक्ष कानून के सवाल को समझते हैं और अदालत भी इस विषय से पूरी तरह परिचित है. जजों ने स्पष्ट किया कि पक्षकार अपना काम करें और अदालत अपना काम करेगी. न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि अपील के अंतिम निपटारे के लिए उचित समय निर्धारित किया जाएगा. साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि मामले में कई आरोपी 60 से 80 वर्ष की आयु वर्ग में हैं, जिसे अदालत ने संदर्भ के तौर पर नोट किया.
बहस के दौरान सीबीआई ने यह भी कहा कि दोषसिद्धि के बाद जमानत मिलने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. वहीं बचाव पक्ष ने प्रक्रिया संबंधी खामियों और अन्य आरोपियों की स्थिति का हवाला देकर सुनवाई स्थगित करने का पक्ष रखा. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई फाइलें लंबित हैं और मामले को अप्रैल में सूचीबद्ध किया जाएगा. जिन मामलों में प्रतिवादी की मृत्यु हो चुकी है, उन्हें बंद करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी.






















