बिहार सरकार के पथ निर्माण एवं उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल (Dilip Jaiswal) ने पूर्णिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्र की विकास नीति, बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम और बिहार की मौजूदा सियासत को एक व्यापक संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पश्चिम बंगाल में कई बड़ी विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, जिनका लाभ केवल बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश को मिलेगा। इसी क्रम में प्रधानमंत्री का पूर्णिया में ट्रांजिट विजिट भी हुआ, जिसे उन्होंने क्षेत्र के लिए अहम संकेत बताया।
दिलीप जायसवाल ने कहा कि मोदी सरकार की कार्यशैली केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार सृजन को केंद्र में रखकर योजनाओं को जमीन पर उतारा जा रहा है। बंगाल में होने वाले कार्यक्रम को उन्होंने “विकास की निरंतरता” का उदाहरण बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्यों की सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में फैसले ले रही है।

विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए मंत्री ने कहा कि जनता ने विपक्ष को पांच साल के लिए छुट्टी दे दी है और यह समय उन्हें अपने संगठन को मजबूत करने में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी दल में टूट तब होती है जब नेतृत्व पर भरोसा कमजोर पड़ता है। उन्होंने कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि दही-चूड़ा भोज जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक आयोजन में भी पार्टी के कई विधायक अनुपस्थित रहे, जो आंतरिक असंतोष को दर्शाता है।
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पूर्णिया की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि कुछ विपक्षी नेता और स्थानीय सांसद इस सोच में रहते हैं कि बिहार में कहीं कोई घटना घटे ताकि उनकी राजनीतिक सक्रियता बनी रहे। उन्होंने इसे नकारात्मक राजनीति करार देते हुए कहा कि जहां बिहार आज अगले बीस वर्षों की विकास योजना के साथ आगे बढ़ने की सोच रहा है, वहीं कुछ नेता अब भी सिर्फ अपनी नेतागिरी चमकाने में लगे हैं।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अदालत की टिप्पणी से यह साफ होता है कि अब ममता बनर्जी का केंद्रीय एजेंसियों पर भरोसा नहीं रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कागज और फाइल को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रिया ममता बनर्जी की ओर से सामने आई, वह लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है। जायसवाल ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है और इससे समझौता नहीं किया जाना चाहिए।






















