बिहार के गोपालगंज जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां गंडक नदी पर स्थित ऐतिहासिक डुमरिया घाट पुल अब गंभीर खतरे में पड़ गया है।यह पुल, जो एनएच-27 पर स्थित है और 1974 में निर्मित हुआ था, इसकी भार वहन क्षमता महज 110 टन बताई जाती है। लेकिन हाल ही में 210 टन वजनी दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग को इस पुल से पार कराने के दौरान पुल का महत्वपूर्ण हिस्सा—स्प्रिंग (बेयरिंग)—क्षतिग्रस्त हो गया।
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यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से तराशकर लाया गया था और इसे पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया में बन रहे विराट रामायण मंदिर में स्थापित करने के लिए ले जाया जा रहा था। शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट है और इसे विशेष 100+ पहियों वाले ट्रेलर पर लादा गया था, जिसका कुल भार (शिवलिंग + ट्रेलर) 370 टन से अधिक हो गया।पुल की क्षमता से लगभग दोगुना भार पड़ने के कारण पुल में प्राकृतिक कंपन (वाइब्रेशन) पूरी तरह रुक गया है। पुलों की संरचनात्मक मजबूती के लिए यह कंपन बेहद आवश्यक माना जाता है, क्योंकि यह भार वितरण और संतुलन बनाए रखता है। बेयरिंग खराब होने से पुल की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे भविष्य में हादसे का खतरा बढ़ गया है।
इस घटना के बाद प्रशासन ने एनएच-27 पर भारी वाहनों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है और वैकल्पिक पुल के निर्माण कार्य को तेज कर दिया गया है। पुल के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है, जबकि यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण यातायात मार्ग है।






















