ED Raid Bihar: रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े ने गुरुवार को बिहार में सनसनी फैला दी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम जैसे ही मुजफ्फरपुर पहुंची, वैसे ही इस नेटवर्क से जुड़े लोगों में अफरा-तफरी मच गई। मुजफ्फरपुर के रामबाग चौड़ी इलाके में ईडी की गाड़ी रुकते ही मुख्य आरोपी के रिश्तेदार कामेश्वर पांडेय घर छोड़कर फरार हो गया। छत के रास्ते भागे कामेश्वर की यह जल्दबाजी खुद इस बात की ओर इशारा कर रही है कि मामला कितना गहरा और संगठित है।
ईडी की यह कार्रवाई सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि रेलवे जॉब फ्रॉड से जुड़े तार देश के छह राज्यों तक फैले पाए गए। इसी कड़ी में मुजफ्फरपुर और पूर्वी चंपारण के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। मुजफ्फरपुर के शास्त्री नगर इलाके में नंदकिशोर गुप्ता के मकान में किराए पर रह रहे कामेश्वर पांडेय के घर करीब छह घंटे तक तलाशी चली। टीम ने दस्तावेज खंगाले, परिजनों से पूछताछ की और पूरे घर को सील कर जांच की प्रक्रिया पूरी की।
जांच एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक यह छापेमारी रेलवे समेत अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी और फर्जी ट्रेनिंग सेंटर चलाने के मामले से जुड़ी है। कामेश्वर पांडेय को मुख्य आरोपी राजेंद्र तिवारी का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है। हालांकि, ईडी ने बरामदगी को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि लेनदेन से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।
मकान मालिक नंदकिशोर गुप्ता ने बताया कि कामेश्वर बीते 19 दिसंबर से उनके यहां रह रहा था और उसने खुद को छपरा का निवासी बताया था। पहचान के तौर पर उसने मुजफ्फरपुर के चंदवारा इलाके का आधार कार्ड दिया था। दिलचस्प बात यह है कि कामेश्वर का परिवार पिछले तीन दशकों से मुजफ्फरपुर में रह रहा है, फिर भी वह अपनी पहचान और ठिकाने को लेकर अलग-अलग दावे करता रहा। ईडी की रेड के बाद मकान मालिक ने उसे घर खाली करने को कह दिया है।
कामेश्वर के परिवार में पत्नी, बेटा, बहू और तीन पोता-पोती शामिल हैं, जो स्थानीय स्तर पर व्यवसाय करते हैं। ईडी की कार्रवाई के बाद परिवार की ओर से यह सफाई दी गई कि किसी रिश्तेदार के लोन मामले में बैंककर्मी पूछताछ के लिए आए थे, लेकिन मोहल्ले के लोग इस कहानी को संदेह की नजर से देख रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई किसी मामूली बैंक लोन का मामला नहीं हो सकती।
इसी मामले में ईडी ने पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में भी दो अहम ठिकानों पर छापेमारी की। कोटवा प्रखंड के अमवा गांव में सक्षम श्रीवास्तव के घर और डुमरियाघाट थाना क्षेत्र के सेमुआपुर गांव में दीपक तिवारी के आवास पर लंबी तलाशी ली गई। सेमुआपुर में तो ईडी की टीम करीब 15 घंटे तक जमी रही। घर के हर कोने की जांच हुई और परिजनों से संपत्ति, बैंक खाते और लेनदेन को लेकर सवाल-जवाब किए गए।
अमवा गांव में पूछताछ के दौरान सक्षम श्रीवास्तव और उनके पिता से जमीन-जायदाद और आमदनी के स्रोतों की जानकारी ली गई। उनके पिता राम प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि परिवार साधारण खेती-किसानी से जीवन यापन करता है और उनका किसी फर्जीवाड़े से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, डुमरियाघाट के सेमुआपुर में रहने वाले दीपक तिवारी के घर पर जब ईडी पहुंची, तब वह मौके पर मौजूद नहीं था। बताया जा रहा है कि वह गोरखपुर में है। टीम ने उसकी पत्नी से पूछताछ की और कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।
दरअसल, इस पूरे नेटवर्क की परतें तब खुलनी शुरू हुई थीं जब 6 दिसंबर 2024 को मुजफ्फरपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भटहां गांव में पुलिस ने एक फर्जी ट्रेनिंग सेंटर का भंडाफोड़ किया था। रेलवे सुरक्षा बल और अन्य विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से मोटी रकम वसूली जा रही थी। उस समय भटहां निवासी सन्नी कुमार की गिरफ्तारी हुई थी और मौके से कई अहम दस्तावेज, हथियार और आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी।
सोनपुर रेल थाने में दर्ज केस के आधार पर जब जांच आगे बढ़ी तो दीपक तिवारी का नाम सामने आया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि सक्षम श्रीवास्तव और घोड़ासहन के दीघा निवासी पप्पू कुमार के साथ मिलकर वह फर्जी तरीके से रेलवे और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का धंधा चला रहा था। जिस परिसर में ट्रेनिंग सेंटर चल रहा था, वह पप्पू कुमार का बताया गया। यही बयान अब ईडी की जांच का आधार बना है।






















