गुरुवार की सुबह देश भर में प्रवर्तन निदेशालय (ED Raid on Govt Job Scam) की एक समन्वित कार्रवाई ने सरकारी नौकरी के सपने बेचने वाले बड़े रैकेट की परतें उधेड़ दीं। ईडी ने एक संगठित गिरोह के खिलाफ जांच करते हुए छह राज्यों के पंद्रह शहरों में एक साथ छापेमारी शुरू की, जिससे बिहार सहित उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात और केरल में हलचल तेज हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह गिरोह कई वर्षों से बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का भरोसा दिलाकर करोड़ों की ठगी कर रहा था।
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क भारतीय रेलवे सहित कम-से-कम 40 सरकारी विभागों के नाम का इस्तेमाल करके नियुक्ति पत्र, कॉल लेटर और फर्जी ऑफर डॉक्यूमेंट तैयार करता था। रेलवे के साथ-साथ डाक विभाग, वन विभाग, टैक्स डिपार्टमेंट, हाई कोर्ट, बिहार सरकार, लोक निर्माण विभाग, डीडीए और राजस्थान सचिवालय जैसे प्रमुख संस्थानों को भी इस गिरोह ने निशाने पर लिया। फर्जी दस्तावेजों की गुणवत्ता और डिजाइन इतने असली जैसे थे कि आम आवेदक धोखे को पहचान ही नहीं पाता था।
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छापेमारी का दायरा भी बड़ा है। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर, इलाहाबाद और लखनऊ, Bihar में मुजफ्फरपुर और मोतिहारी, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, तमिलनाडु के चेन्नै, गुजरात के राजकोट और केरल के चार शहरों में ईडी की विशेष टीमें लगातार दस्तावेज और डिजिटल सबूत कब्जे में ले रही हैं। शुरुआती बरामदगी में ईमेल ट्रेल, फर्जी लेटरहेड, अकाउंट डिटेल और नकली जॉब ऑफर से जुड़े कई अहम कागजात सामने आए हैं।
ईडी सूत्रों के अनुसार गिरोह का फर्जीवाड़ा सिर्फ नियुक्ति पत्र तक सीमित नहीं था बल्कि वे बेहद ‘प्रोफेशनल’ तरीके से सरकारी विभागों के जैसे ईमेल एड्रेस बनाते थे। इन ईमेल आईडी से पीड़ितों को ऑफर लेटर और जॉइनिंग से संबंधित दस्तावेज भेजे जाते थे। कुछ मामलों में भरोसा जीतने के लिए आयकर या रेलवे विभाग की तरह प्रतीत होने वाली सैलरी भी पीड़ितों के खातों में 2 से 3 महीने तक भेजी गई। इसके बाद उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। गिरोह खासतौर पर आरपीएफ, टीटीई और रेलवे टेक्नीशियन जैसे पदों के नाम पर नौकरी दिलाने का वादा करता था।




















