रांची/डेस्क: प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक बार फिर सक्रिय हो गया है और राजधानी रांची में कई स्थानों पर छापेमारी कर रहा है। गुरुवार की सुबह से ही ED की टीमें रांची के विभिन्न इलाकों में पहुंचीं और एक साथ करीब दर्जनभर ठिकानों पर कार्रवाई शुरू की। इनमें मोरहाबादी, बरियातू, अशोकनगर, पीपी कंपाउंड और लालपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अभी तक ED की ओर से छापेमारी के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े आयुष्मान भारत योजना में हुए घोटाले से संबंधित हो सकती है। इस घोटाले का दायरा न केवल रांची तक सीमित है, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ बताया जा रहा है। ED की यह रेड इसी फर्जीवाड़े की जांच के लिए चल रही है।
रांची में ED की छापेमारी के प्रमुख ठिकाने
रांची में अब तक कई जगहों पर ED की टीमें सक्रिय दिखीं। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई है। CAG की रिपोर्ट में उजागर हुए तथ्यों के बाद ED ने इस मामले में एक्शन लिया है। छापेमारी के कुछ प्रमुख स्थान इस प्रकार हैं:
- बरियातू रोड के श्याम इंक्लेव में सुजीत यादव के आवास पर कार्रवाई।
- पीपी कंपाउंड में MD इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के ऑफिस और शेट्टी कॉर्पोरेट के ठिकाने पर रेड।
- मोरहाबादी के ललिता आर्किड अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 406 में छापेमारी।
- हटिया के आसी गार्डन, C ब्लॉक, दिनकर नगर में भी ED की दबिश।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के सहायक पर भी शिकंजा
इसके अलावा, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के निजी सचिव (PA) रहे गुड्डू सिंह के ठिकानों पर भी ED ने छापा मारा है। आयुष्मान भारत योजना में कथित अनियमितताओं के चलते यह कार्रवाई की जा रही है। छापेमारी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
क्या है आयुष्मान भारत घोटाला?
दरअसल, अगस्त 2023 में लोकसभा में पेश CAG की रिपोर्ट में आयुष्मान भारत योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ था। इस रिपोर्ट में रांची के 9 अस्पतालों सहित राज्य के 212 अस्पतालों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा था। इन अस्पतालों पर योजना के तहत फर्जी दावे कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का इल्जाम था। जांच में पाया गया कि कई अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती किए बिना ही इलाज के नाम पर भुगतान हासिल किया, तो कहीं पैसे लेकर लाभार्थियों को इलाज देने से इनकार किया गया।
सरकार ने 104 सेवा और अन्य जांच तंत्रों के जरिए मरीजों से संपर्क कर इन दावों की पड़ताल की, जिसके बाद फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। इसके परिणामस्वरूप 78 अस्पतालों को आयुष्मान योजना की सूची से हटा दिया गया, 89 अस्पतालों से लगभग 1 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, और 250 से अधिक अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। एक अस्पताल संचालक के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।
ED का बयान
ED के एक अधिकारी ने कहा, “जांच से पता चला है कि आयुष्मान भारत योजना में सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई, जिसके जरिए अपराध से आय अर्जित की गई। इसमें अस्पतालों के पैनल में हेरफेर, फर्जी दावों का प्रसंस्करण और कमीशन/किकबैक की मांग शामिल थी।” फिलहाल, रांची में चल रही यह छापेमारी आयुष्मान भारत घोटाले की गुत्थी सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।