छपरा में पैथोलॉजिकल जांच के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां कई फर्जी लैब और फर्जी जांच के मामले लगातार सामने आ रहे है।. बता दे कि दो वर्ष पूर्व भी सारण जिले में संचालित 57 फर्जी पैथोलॉजिकल जांच सेंटरों को जिला प्रशासन के द्वारा कानूनी कार्रवाई करते हुए बंद कराया गया था। क्योंकि उन सेंटरों पर ना तो चिकित्सक थे और ना ही पैथोलॉजिस्ट। आज स्थिति और भी भयावह होती नजर आ रही है, जहां मरीजों का आर्थिक शोषण के साथ उनकी जान से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। ताजा मामला छपरा सदर सदर अस्पताल में भर्ती डेंगू पीड़ित मरीज को लेकर सामने आया है। बड़ी बात यह है कि छपरा सदर अस्पताल में डेंगू जांच निशुल्क उपलब्ध होने के बावजूद सदर अस्पताल में भर्ती मरीज का जांच प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटर के द्वारा कर दिया गया और जांच का ₹1000 लेने के बावजूद गलत जांच रिपोर्ट दिया गया है।
बता दें कि, सारण जिला के भेल्दी थाना अंतर्गत मदारपुर गांव निवासी श्रवन साह की 12 वर्षीय पुत्री निक्की कुमारी की तबियत खराब होने की वजह से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार इमरजेंसी वार्ड में चल रहा था। चिकित्सक के द्वारा उपचार के क्रम में डेंगू जांच कराने को कहा गया। वही एक प्राइवेट पैथोलॉजी के एजेंट ने मरीज के परिवार वालों को झांसे में लेकर रिपोर्ट देने के नाम पर ₹1000 ले लिया., लेकिन, जो रिपोर्ट उसके द्वारा मरीज के परिजनों को दिया गया वह और भी हास्यास्पद था रिपोर्ट अपने आप में फर्जी लैब होने की कहानी कह रहा था। उस रिपोर्ट को सदर अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने देखकर गलत ठहरा दिया। क्योंकि, उस रिपोर्ट में आईजीएम जांच का रिपोर्ट पॉजिटिव लिखा हुआ था। जबकि आईजीएम जांच किट पर वह नेगेटिव शो कर रहा था। जिसके बाद मरीज को उस पैथोलॉजी जांच वाले को बुलाने को कहा गया। लेकिन जैसे ही उस पैथोलॉजी सेंटर वाले को इस घटना की जानकारी हुई, वह अस्पताल तो आया लेकिन रिपोर्ट हाथ में लेकर वहां से रफूचक्कर हो गया। जबकि वह जांच रिपोर्ट की एक कॉपी मीडिया के पास आ चुकी थी। उस रिपोर्ट को भी हम आपको दिखाने जा रहे हैं। यह जांच रिपोर्ट रेखा डायग्नोस्टिक सेंटर के द्वारा दिया गया है. जो कि छपरा शहर के भगवान बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत कोनिया माई स्थान के समीप स्थित है।





















