VB-G-RAM-G बिल को लेकर संसद के गलियारों से लेकर सियासी मंचों तक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस बिल पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को भगवान राम के नाम से दिक्कत है। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब सरकार गांव, गरीब और मजदूर के मुद्दे को विकास और आस्था के साथ जोड़कर नई राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस शासनकाल की मनरेगा योजना को भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा कि उस दौर में यह योजना पारदर्शिता के अभाव में दम तोड़ रही थी। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद मनरेगा में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार किए गए, जिससे मजदूरी का पैसा सीधे मजदूरों के बैंक खातों में पहुंचने लगा। उन्होंने इसे न केवल वित्तीय पारदर्शिता की मिसाल बताया, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम करार दिया।
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उन्होंने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के समय मनरेगा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया था, जबकि मोदी सरकार ने पारदर्शिता लाकर सीधे मजदूरों के खाते में पैसा भेजा। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि यूपीए के 10 वर्षों में मात्र 2.13 लाख करोड़ रुपये आवंटित हुए, जबकि मोदी सरकार ने 8.50 लाख करोड़ से अधिक की राशि दी है। अब राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे मजदूरों को 100 के बजाय 125 दिन का रोजगार दे सकें। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर विपक्ष को सवा सौ दिन के काम से नफरत है, तो वे खुलकर कहें।






















