केंद्र सरकार ने उत्तर बिहार के विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए बेतिया जिले से गुजरने वाले छह लेन गोरखपुर–सिल्लीगुड़ी एक्सप्रेस वे (Gorakhpur–Siliguri Expressway) को अंतिम मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के साथ ही परियोजना धरातल पर उतरने की प्रक्रिया तेज हो गई है और प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी है। यह एक्सप्रेस वे न केवल पश्चिम चंपारण बल्कि पूरे सीमावर्ती और मिथिला क्षेत्र के आर्थिक नक्शे को बदलने वाला माना जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना के लिए थ्री-ए के तहत एलाइनमेंट की अधिसूचना जारी कर दी गई है। बेतिया जिले के बैरिया और नौतन प्रखंड से कुल 14 मौजों को इसमें शामिल किया गया है, जिनमें दोनों प्रखंडों से सात-सात मौजे चयनित किए गए हैं। अधिसूचना जारी होने के बाद अब प्लॉट की पहचान का कार्य शुरू होगा, जिससे मुआवजा निर्धारण और आगे की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गति मिलेगी।
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जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार के अनुसार एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए बेतिया जिले में लगभग 187.23 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। उनका मानना है कि इस परियोजना के पूरा होते ही जिले में व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखने को मिलेंगे। सड़क निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निर्माण से जुड़ी गतिविधियों के साथ-साथ सेवा क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
करीब 550 किलोमीटर लंबा गोरखपुर–सिल्लीगुड़ी एक्सप्रेस वे देश की पूर्वी सीमा को उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली एक रणनीतिक सड़क परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। अनुमान है कि इस पर लगभग 37,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। खास बात यह है कि इस एक्सप्रेस वे पर बड़े टर्मिनल विकसित नहीं किए जाएंगे, जिससे वाहनों की गति बनी रहेगी और लंबी दूरी की यात्रा पहले की तुलना में कहीं कम समय में पूरी हो सकेगी।
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यह एक्सप्रेस वे बिहार के आठ जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगी। इसके माध्यम से राज्य के 39 प्रखंडों और 313 गांवों को सीधा संपर्क मिलेगा, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों का देश के अन्य हिस्सों से जुड़ाव मजबूत होगा।
परियोजना की योजना इस तरह तैयार की गई है कि एक्सप्रेस वे शहरी इलाकों से दूर रहे। इससे भूमि अधिग्रहण में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतें कम होंगी और निर्माण कार्य भी अपेक्षाकृत तेजी से पूरा किया जा सकेगा। जिन क्षेत्रों से यह सड़क गुजरेगी वहां परिवहन सुलभ होने से छोटे उद्योग, कृषि आधारित कारोबार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।






















