डेस्क : बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं, पर हाल के दिनों में हमले बढ़े हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे भारत समेत वैश्विक समुदाय के लिए यह चिंता का विषय बन गई है। इस संदर्भ में, बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए एक अलग राष्ट्र बनाने का विचार जोर पकड़ रहा है। इस प्रस्ताव से न केवल बांग्लादेशी हिंदुओं को एक सुरक्षित स्थान मिल सकता है, बल्कि भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा चुनौतियां भी कम हो सकती हैं।
नया देश: एक संभावित समाधान?
इस योजना के तहत बांग्लादेश के रंगपुर और चटगांव डिवीजन को अलग कर एक नया राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव है। इस विचार को लेकर स्वराज्य वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इससे हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों को एक सुरक्षित घर मिल सकता है। साथ ही, भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को भी सुरक्षित किया जा सकता है।
पूर्वोत्तर भारत और चिकन नेक की सुरक्षा
भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र एक भौगोलिक चुनौती का सामना करता है। यह क्षेत्र देश के बाकी हिस्सों से केवल 22 किलोमीटर चौड़े ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर के माध्यम से जुड़ा हुआ है, जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरा हुआ है। इस कॉरिडोर की सुरक्षा लंबे समय से चिंता का विषय रही है, क्योंकि बांग्लादेश के कट्टरपंथी समूह इस पर कब्जे की धमकी देते रहे हैं। यदि रंगपुर क्षेत्र को भारत में शामिल किया जाता है, तो इस कॉरिडोर की चौड़ाई 150 किलोमीटर तक बढ़ सकती है, जिससे इसकी सुरक्षा में काफी सुधार होगा।
अल्पसंख्यकों की स्थिति और संभावित समाधान
बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय लगातार हमलों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास देश छोड़ने या इस्लाम में परिवर्तित होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। भारत में शरण लेना स्थायी समाधान नहीं है, इसलिए एक नए राष्ट्र का निर्माण किया जाना एक दीर्घकालिक उपाय हो सकता है।
रंगपुर और चटगांव: एक नया राष्ट्र?
रंगपुर डिवीजन पश्चिम बंगाल के उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जिलों से सटा हुआ है। इसके उत्तर-पश्चिम में सिलीगुड़ी, उत्तर में जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जिले हैं, और पूर्व में असम के धुबरी व मेघालय के गारो हिल्स क्षेत्र हैं। यह भौगोलिक स्थिति इसे एक आदर्श नया राष्ट्र बनाने के लिए उपयुक्त बनाती है। चटगांव डिवीजन का पहाड़ी क्षेत्र (चटगांव हिल ट्रैक्ट्स – CHT) भी त्रिपुरा और मिजोरम की सीमाओं से लगा हुआ है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से बौद्ध और हिंदू समुदायों का घर रहा है, जो अब धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं
1971 में जब बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हो सकता है, तो क्या यह नया राष्ट्र भी संभव हो सकता है? यह विचार भले ही फिलहाल काल्पनिक लगे, लेकिन यदि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते यह प्रस्ताव वास्तविकता में बदल सकता है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह मुद्दा भविष्य में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।