गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र के बुरुह गांव निवासी सुप्रीती कच्छप ने खेलो इंडिया यूथ गेम में गोल्ड मेडल जीतने के साथ-साथ एथलीट में राष्ट्रीय रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज की है। आज चारों ओर सुप्रीती की चर्चा है। जब सुप्रीती कच्छप खेलो इंडिया यूथ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत कर अपने गांव बुरुह पहुंची तो गांव के सभी लोगों ने मिलकर सुप्रिती कच्छप को फूल माला पहनाकर ढोल नगाड़े के साथ स्वागत कर घर लाया गया। वहीं सुप्रीती के घर मैं बधाई देने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। वही गांव के लोगों ने अपने आप में गर्व महसूस कर रहे हैं की एक छोटे से गांव की बच्ची ने पूरे झारखंड का मान बढ़ाया।
अंडर- 20 वर्ल्ड कप में भी चयन हुआ
वही सुप्रीती ने बताया कि अंडर 20 वर्ल्ड कप चैंपियनशिप के लिए भी वह चयनित है यह प्रतियोगिता दो अगस्त से सात अगस्त तक कोलंबिया में खेला जाएगा जिसके लिए सुप्रीती का चयन हो चुका है इस वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए सुप्रीती अभी से ही तैयारी में लग गई है। सुप्रीती ने दौड़ की शुरुआत चैनपुर स्कूल से की थी सुप्रीती ने 14 वर्ष की उम्र से ही दौड़ की अभ्यास शुरू कर दी थी इस दौरान सुप्रीती चैनपुर स्थिति आवासीय विद्यालय में रहकर पढ़ाई करती थी जहां से उसने दौड़ने की शुरुआत की जिसके बाद संत पात्रिक हाई स्कूल गुमला में नामांकन के उपरांत अपने दौड़ के अभियास को और तेज किया जिसके बदौलत आज झारखंड को गोल्ड मेडल दिलाया।
पिता को नक्सलियों ने मार दिया
21 साल पहले पिता को नक्सलियों ने हत्या कर दी थी आज उसकी बेटी एथलीट में राष्ट्रीय रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज किया एवं खेलो इंडिया खेलो यूथ गेम में गोल्ड मेडल पाकर नाम रोशन कर रही है।
किसी भी संसाधन में की कमी होने नहीं दिया
हरियाणा के पंचकुला में चल रहे खेलो इंडिया यूथ गेम में घाघरा प्रखंड के गुरु ग्राम निवासी सुप्रीती कच्छप ने 3000 मीटर दौड़ को 9 मिनट 40 सेकंड में पूरा करते हुए अंडर – 18 वर्ग में एक नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज की है। इससे पहले यह रिकॉर्ड सीमा कुमारी के नाम था जो 2017 में 9 मिनट 50 सेकंड में दौड़ पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाई थी, जिस रिकॉर्ड को सुप्रीती ने प्रतियोगिता में रिकॉर्ड तोड़ते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज की। सुप्रीती ने 3000 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया सुप्रीती की सफलता में झारखंड को गोल्ड मेडल दिलाने के बाद पूरे गुमला जिला वासियों में खुशी की लहर है। सुप्रीती एवं उसकी मां बालमइत देवी को बधाई एवं शुभकामना दे रहे हैं।
वहीं सुप्रीती ने बताया कि इस सफलता का श्रेय मां एवं परिवार को दिया जिन्होंने किसी भी संसाधन में की कमी होने नहीं दिया एथलीट में किसी भी चीज की आवश्यकता होती थी, तुरंत मेरे नजरों के सामने मेरे परिवार वालों ने उपलब्ध करा देते थे, जिसकी बदौलत मैं आज इस मुकाम को हासिल कर पाएंगे।




















