संसद में इमिग्रेशन और फॉरेनर्स बिल पर सोमवार को जबरदस्त बहस हुई। शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने इस विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश को धर्मशाला नहीं बनने देने की बात कही जा रही है, लेकिन क्या इसे जेल में तब्दील किया जा रहा है? उन्होंने चेतावनी दी कि इस बिल के कठोर प्रावधानों के चलते भारत में टूरिज्म, बिजनेस और विदेशी निवेश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
संजय राउत ने गृह मंत्री की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि “यह देश किसी के लिए धर्मशाला नहीं, लेकिन यह जेल भी नहीं है!” उन्होंने कटाक्ष किया कि विदेश से आने वाले टूरिस्ट, बिजनेसमैन, कलाकार, और पत्रकारों पर सख्त पाबंदियां लगाई जा रही हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि भारत में अवैध प्रवासियों की समस्या पुरानी है, लेकिन इस समस्या के बहाने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला नहीं किया जाना चाहिए। अगर यह कानून पास हो गया, तो भारत में विदेशी नागरिकों को आने से पहले सौ बार सोचना पड़ेगा।
“ट्रंप ने भारतीयों को बेड़ियों में बांधकर निकाला, अब अमेरिका पर भी यही नियम लागू हो!”
संजय राउत ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति का जिक्र किया, जिसमें अवैध भारतीय प्रवासियों को पकड़कर उन्हें जंजीरों में बांधकर भारत भेजा गया था। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि “अगर अमेरिका का कोई नागरिक भारत में अवैध रूप से रहता है, तो क्या सरकार उसे भी उसी तरह जंजीरों में बांधकर वाशिंगटन भेजेगी?”
उन्होंने कहा कि सरकार को अवैध घुसपैठ रोकनी चाहिए, लेकिन इस बहाने एक ऐसा कानून नहीं बनाना चाहिए, जो निर्दोष लोगों को भी फंसा दे।
“रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ पर पहली बार किसने आवाज उठाई?”
राउत ने स्पष्ट किया कि शिवसेना ने सबसे पहले मुंबई में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आंदोलन किया था। हम ही थे जिन्होंने बाला साहब ठाकरे के नेतृत्व में कहा था कि मुंबई में एक भी बांग्लादेशी नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि आज जब घुसपैठियों को हटाने की बात हो रही है, तो यह नहीं भूलना चाहिए कि असली आतंकवादी कभी पासपोर्ट-वीजा लेकर नहीं आते, बल्कि वे कसाब की तरह समुद्र के रास्ते से घुसते हैं और हमले करके गायब हो जाते हैं।
“विदेशियों की हर गतिविधि पर सरकार की नजर?”
राउत ने बिल के सबसे विवादास्पद हिस्से—सेक्शन 7—पर जोर देते हुए कहा कि यह सरकार को विदेशी नागरिकों पर अत्यधिक नियंत्रण देने वाला कानून है। अगर कोई विदेशी पत्रकार, डिप्लोमैट, कलाकार या स्टूडेंट डेलिगेशन भारत में आता है और किसी विपक्षी नेता से मिलना चाहता है, तो उसे सरकार से इजाजत लेनी होगी।
उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर कोई विदेशी नेता राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे, या विपक्ष के किसी अन्य नेता से मिलना चाहे और सरकार अनुमति न दे, तो क्या यह लोकतंत्र रहेगा?”
“बिल में सुधार जरूरी, इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाए”
संजय राउत ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि वह अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कानून के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इस बिल में कई प्रावधान ऐसे हैं, जो आम लोगों की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने मांग की कि “इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजकर दोबारा चर्चा की जाए, ताकि इसे ज्यादा संतुलित और न्यायसंगत बनाया जा सके।”