मधेपुरा: डॉक्टर बनने का सपना देख रहे बेतिया (पश्चिम चंपारण) के निवासी अमन कुमार ने MBBS में दाखिले के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र का सहारा लिया, लेकिन कॉलेज प्रबंधन की सतर्कता से उनका खेल खुल गया। अब उनके खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में FIR दर्ज की गई है और जेल की हवा खाने की नौबत आ सकती है।
जननायक कर्पूरी ठाकुर चिकित्सा महाविद्यालय, मधेपुरा में काउंसलिंग के दौरान अमन कुमार ने IGIMS पटना के नाम पर जारी होने वाला एक दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जमा किया था। इस प्रमाण-पत्र के आधार पर उन्हें दिव्यांग कोटे से MBBS सीट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन कॉलेज प्रबंधन को प्रमाण-पत्र पर हस्ताक्षर और अन्य विवरणों में संदेह हुआ।
जांच में खुलासा हुआ कि प्रमाण-पत्र पूरी तरह जाली था। छात्र अमन कुमार आंखों की किसी भी दिव्यांगता से ग्रस्त नहीं है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। फर्जी दस्तावेज जमा करने के प्रयास में कॉलेज प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।इस मामले में छात्र के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अगर दोषी पाया गया तो उसे लंबी सजा का सामना करना पड़ सकता है।






















