देश की राजनीति में ‘वोट चोरी’ (Vote Chori Controversy) का मुद्दा अब केवल चुनावी बहस नहीं, बल्कि विपक्षी एकजुटता की कसौटी बनता दिख रहा है। लंबे समय से कांग्रेस इस मुद्दे को केंद्र में रखकर निर्वाचन आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों से इसे लोकतंत्र से जोड़कर पेश किया, लेकिन अब उसी मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन INDIA के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ की थ्योरी से खुद को अलग करते हुए साफ कहा कि इस मसले से INDIA गठबंधन का कोई लेना-देना नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस इसे राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश में है। उमर अब्दुल्ला की दूरी को केवल एक व्यक्तिगत राय मानकर टालना मुश्किल है, क्योंकि यह बयान विपक्षी एकजुटता के दावे पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
उमर अब्दुल्ला के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस पर हमला बोलने का नया मौका मिल गया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह उनकी “थेथरोलॉजी” है, जिसके जरिए वे चुनावी हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ते हैं और कार्यकर्ताओं को झूठा दिलासा देते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस को सच में हिम्मत है तो वह अपने सहयोगी दलों के नेताओं, जैसे उमर अब्दुल्ला और सुप्रिया सुले, से इस मुद्दे पर जवाब क्यों नहीं मांगती। गिरिराज सिंह ने यह भी तंज कसा कि जिन राज्यों में कांग्रेस जीतती है, वहां उसे वोट चोरी नहीं दिखती, जबकि हारते ही आरोपों की राजनीति शुरू हो जाती है।
कांग्रेस की हालिया मेगा रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी को लेकर भी बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाया। गिरिराज सिंह ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बार-बार किया गया है, लेकिन अब जनता इससे ऊब चुकी है और देश उनसे माफी की मांग कर रहा है। बीजेपी का दावा है कि नकारात्मक राजनीति कांग्रेस की चुनावी विफलताओं का मूल कारण बनती जा रही है।
वहीं SIR मुद्दे पर भी कांग्रेस को अपने ही गठबंधन के भीतर असहजता का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी सांसद शशांक मणि ने कहा कि राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बिहार में लंबी यात्राएं कीं, लेकिन नतीजे नाममात्र के रहे। उनके मुताबिक उमर अब्दुल्ला भी यह समझ चुके हैं कि यह कोई बड़ा राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक मामला है। शशांक मणि ने यहां तक दावा किया कि आने वाले समय में INDIA गठबंधन से एक-एक कर सहयोगी दल दूर होते जाएंगे और अंत में राहुल गांधी अकेले रह जाएंगे।






















